राजस्थान विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीयविधायी प्रारूपण प्रशिक्षणकार्यक्रम का हुआ आयोजन
जयपुर (कमलेश जैन) राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के विधि विभाग द्वारा संसदीय लोकतंत्रों के लिए अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE), लोकसभा सचिवालय, भारत सरकार के सहयोग से 37वें अंतरराष्ट्रीय विधायी प्रारूपण प्रशिक्षण कार्यक्रम (ILD) के अंतर्गत एक संवादात्मक कार्यक्रम का सफल आयोजन UGC-MMTTC, राजस्थान विश्वविद्यालय में किया गया। इस कार्यक्रम में 18 देशों से आए 43 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों तथा शिक्षाविदों ने विधायी प्रारूपण की समकालीन प्रवृत्तियों एवं चुनौतियों पर सार्थक चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ, तत्पश्चात वंदे मातरम् एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया गया। मंचासीन अतिथियों का सम्मान किया गया, जिससे कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ हुआ। विधि विभाग की अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता डॉ. संजुला ठानवी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए विधायी प्रारूपण के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात कार्यक्रम का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए आयोजन सचिव डॉ. मनोज मीणा ने इस अंतरराष्ट्रीय पहल की उपयोगिता पर बल दिया तथा यह विशेष रूप से उल्लेख किया कि राजस्थान विश्वविद्यालय को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी चौथी बार करने का अवसर प्राप्त हुआ है, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा एवं सक्रिय सहभागिता को दर्शाता है।
राजकुमार, निदेशक, PRIDE, लोकसभा सचिवालय ने अपने संबोधन में विधायी प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं डॉ. केएन. चतुर्वेदी, कोर्स डायरेक्टर एवं पूर्व विधि सचिव, भारत सरकार ने विधायी प्रारूपण की तकनीकों एवं बदलते मानकों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा ने विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संवाद सत्र रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न देशों की विधायी प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श किया तथा व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। इसके उपरांत प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय एवं संविधान पार्क का अवलोकन किया। यह कार्यक्रम राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।


