मिड-डे-मील की दाल में मिला मरा चूहा: जाँच करने रामगढ़ ब्लॉक के विद्यालय पहुँची शिक्षा विभाग की टीम
रामगढ़ (अलवर/ राधेश्याम गेरा): रामगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम पंचायत अलावड़ा के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली में मिड-डे-मील के खाने में मरा चूहा मिलने से हड़कंप मच गया। घटना 27 अप्रैल की है, जब बच्चों को परोसी जाने वाली दाल के कंटेनर में मृत चूहा पाया गया। मामला मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और मंगलवार को अधिकारियों की एक संयुक्त टीम जांच के लिए विद्यालय पहुँची।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के विद्यालयों में हेवल्स कंपनी द्वारा संचालित क्यूआरजी फाउंडेशन एनजीओ द्वारा मिड-डे-मील का खाना उपलब्ध कराया जाता है। 27 अप्रैल को जब एनजीओ की गाड़ी दाल छोड़कर गई, तो वितरण से पूर्व पोषाहार प्रभारी और स्टाफ ने दाल को चखने के लिए निकाला। इसी दौरान दाल में मरा हुआ चूहा दिखाई दिया। स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत दाल का वितरण रोक दिया और घटना के वीडियो व फोटो साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किए।
जांच के दौरान विद्यालय स्टाफ और एनजीओ प्रतिनिधियों के बीच विरोधाभास देखने को मिला:
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एनजीओ का पक्ष: एनजीओ प्रतिनिधियों का आरोप है कि खाना पूरी तरह सुरक्षित था और चूहा विद्यालय के कंटेनर में दाल पलटने के बाद गिरा है।
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विद्यालय स्टाफ का पक्ष: पोषाहार प्रभारी और स्टाफ का कहना है कि जैसे ही गाड़ी से दाल पलटी गई, हमने उसे तुरंत ढक दिया था। दाल निकालने पर चूहा अंदर से ही निकला। स्टाफ ने स्पष्ट किया कि एनजीओ अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए उन पर दोषारोपण कर रहा है।
मीडिया में खबरें आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) देवेंद्र सिंह, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और पीईईओ की संयुक्त टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया।
जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया, "शिकायत और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हम जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि चूहा एनजीओ से आए कंटेनर में ही था या विद्यालय में आने के बाद गिरा। जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।"
ग्रामीणों ने एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ है। गनीमत रही कि स्टाफ ने समय रहते देख लिया, अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि दाल में छिपकली जैसा कोई जहरीला जीव होता और बच्चे उसे खा लेते, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
उल्लेखनीय है कि एनजीओ द्वारा भोजन रात में या तड़के सुबह तैयार कर लिया जाता है और सुबह 8 बजे तक स्कूलों में पहुँचा दिया जाता है, जबकि वितरण दोपहर में होता है। जानकारों का कहना है कि अंधेरे में खाना पकाते समय ऐसी लापरवाही होने की प्रबल संभावना रहती है। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा और आक्रोश का माहौल है।


