ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में रामगढ़ के सभी मेडिकल स्टोर रहे बंद; ई-फार्मेसी के अनियंत्रित संचालन और स्थानीय कारोबार प्रभावित होने पर जताया आक्रोश
रामगढ़ (अलवर)। ऑनलाइन दवाइयों की अनियंत्रित बिक्री और ई-फार्मेसी व इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी ऐप्स के बढ़ते प्रभाव के विरोध में बुधवार को रामगढ़ के सभी मेडिकल स्टोर पूर्णतः बंद रहे। फार्मेसी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस बंद को स्थानीय दवा व्यवसायियों का व्यापक समर्थन मिला। सुबह से ही क्षेत्र की सभी निजी दवा दुकानें बंद रहीं, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निजी दुकानें बंद होने के चलते रामगढ़ उपजिला अस्पताल की ओपीडी में अचानक मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और सरकारी दवा काउंटर पर दवाओं के लिए लंबी कतारें देखी गईं।
फार्मेसी मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य ऋषभ जैन ने इस बंद और विरोध प्रदर्शन के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आंदोलन राजस्थान समेत पूरे देश में आम नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा और दवा व्यवसाय को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि देश में संचालित ई-फार्मेसी और दवा डिलीवरी करने वाले मोबाइल ऐप्स बिना किसी स्पष्ट और कड़े नियमों के धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। उचित सत्यापन और बिना वैध डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के दवाओं की ऑनलाइन होम डिलीवरी से समाज में दवाओं के दुरुपयोग और नकली दवाओं के प्रचलन का खतरा काफी बढ़ गया है, जो सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
एसोसिएशन ने ई-फार्मेसी और ऑफलाइन मेडिकल स्टोरों के बीच अपनाई जा रही दोहरी नीति पर भी गहरा क्षोभ व्यक्त किया। श्री जैन ने कहा कि जहां एक ओर सरकारी ड्रग इंस्पेक्टर स्थानीय मेडिकल स्टोरों की दवाओं की गुणवत्ता, रखरखाव, स्टॉक और लाइसेंस की नियमित व कड़ाई से जांच करते हैं, वहीं दूसरी ओर इन बड़ी ऑनलाइन दवा कंपनियों और उनके गोदामों की प्रभावी निगरानी के लिए प्रशासन के पास कोई तंत्र नहीं है। बिना किसी ठोस जांच-परख के दवाइयों की यह ऑनलाइन बिक्री देश की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए बेहद घातक साबित हो रही है।
दवा व्यवसायियों की मुख्य मांगें एवं चिंताएं:
-
व्यापार पर संकट: ऑनलाइन दवा कंपनियों द्वारा दी जा रही अनुचित प्रतिस्पर्धा और भारी छूट के कारण स्थानीय दवा दुकानदारों का पारंपरिक कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
-
तत्काल प्रतिबंध की मांग: संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि बिना स्पष्ट नियमावली और कड़े कानून के चल रही ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
-
उग्र आंदोलन की चेतावनी: फार्मेसी एसोसिएशन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संगठन राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


