मकराना में कानूनी साक्षरता शिविर आयोजित: बाल विवाह व घरेलू हिंसा के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीडवाना के निर्देशानुसार मंगलवार 19 मई 2026 को मकराना में न्यायालय परिसर के पास स्थित पीपली चौक पर ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे लीगल लिटरेसी एंड सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम (रूपांतरणकारी मंगलवार कानूनी साक्षरता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम) का आयोजन किया गया। शिविर में आमजन को बाल विवाह, घरेलू हिंसा के खिलाफ कानूनी सुरक्षा और उनके अधिकारों के बारे में सरल भाषा में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पेनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने कहा कि कानूनन 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी बाल विवाह की श्रेणी में आती है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। अक्सर गरीबी, कर्ज या असुरक्षा के डर से परिवार बच्चों को शादी के लिए मजबूर करते हैं, लेकिन यह समस्याओं को खत्म करने के बजाय और बड़ी मुसीबतें पैदा करता है।
अधिवक्ता हनीफी ने बताया कि बाल विवाह से बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है और पुलिस, शिक्षक या नर्स बनने के उनके सपने टूट जाते हैं। कम उम्र में शादी के बाद लड़कियों पर घरेलू हिंसा और शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना का खतरा बढ़ जाता है। घरेलू हिंसा केवल मारपीट नहीं, बल्कि फोन पर नियंत्रण करना, पढ़ाई रोकना और आर्थिक रूप से निर्भर बनाना भी है। कम उम्र में मां बनना लड़की और बच्चे दोनों की जान के लिए बेहद खतरनाक है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत शादी कराने वाले माता-पिता, पंडित/पुजारी और टेंट-हलवाई जैसे आयोजकों को 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि को अपराध मानता है, भले ही वे विवाहित हों। पति या ससुराल पक्ष द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता पर 3 साल तक की कैद का प्रावधान है।
यदि किसी बच्चे पर शादी का दबाव बनाया जा रहा हो (जैसे अचानक अच्छे रिश्ते की बात करना, स्कूल छुड़ाना या शादी के कपड़े सिलवाना), तो बच्चे तुरंत अपने स्कूल के प्रधानाचार्य या शिक्षकों को बताएं। चाइल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर 1098 पर मुफ्त कॉल करके मदद ली जा सकती है। अधिवक्ता ने बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बाल विवाह रोकने के लिए आशा योजना चलाता है, जिसके तहत पीड़ितों को रेस्क्यू कर शेल्टर होम, शिक्षा और निःशुल्क वकील की सहायता दी जाती है। इसके अलावा साइबर दुर्व्यवहार के पीड़ितों को भी मुफ्त कानूनी मदद दी जाती है।
इस अवसर पर ताल्लुका विधिक सेवा समिति और सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की सराहना की गई। कार्यक्रम में पेनल अधिवक्ता गिरधारी जोशी, विधि सलाहकार हनुमानराम डोबर, अधिवक्ता सारिका खण्डेलवाल, समीर खत्री, शोएब रजा, शब्बीर अहमद सहित लॉ स्टूडेंट मोहम्मद वसीम व कोमल सिंगोदिया उपस्थित थे। ग्रामीण क्षेत्र से रामदीन काट्या, मोतीराम खररा, इन्द्रा चौधरी, गोगा देवी, मोनिका, कार्तिक चौधरी और सांवताराम जुणावा सहित बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।


