किसान एवं बाल कल्याण नवाचार विश्वविद्यालय की स्थापना हो अथवा संस्था को 100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए - गुप्ता
भरतपुर( विष्णु मित्तल)किसानों की आय वृद्धि, ग्रामीण नवाचार, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक कृषि, वैकल्पिक शिक्षा एवं बाल नेतृत्व विकास को एकीकृत करने वाले देश के प्रथम “किसान एवं बाल कल्याण नवाचार विश्वविद्यालय” की स्थापना हेतु समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य सरकार से विश्वविद्यालय स्थापित करने अथवा संस्था को 100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में गुप्ता ने कहा है कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। केन्द्र एवं राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ संचालित कर रही हैं, किन्तु किसानों तक नवीन तकनीकों, अनुसंधान, बाजार आधारित खेती, वैकल्पिक ऊर्जा और उच्च आय वाली कृषि प्रणालियों की व्यवहारिक जानकारी समय पर नहीं पहुँच पाती। इसके परिणामस्वरूप कृषि की वास्तविक क्षमता का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक ऐसे विश्वविद्यालय की आवश्यकता है जो केवल डिग्री देने वाला संस्थान न होकर किसानों, ग्रामीण युवाओं और बच्चों के लिए जीवंत प्रयोगशाला के रूप में कार्य करे। इसके लिए लगभग 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। यदि राज्य सरकार स्वयं इस विश्वविद्यालय की स्थापना करे, अन्यथा समृद्ध भारत अभियान को भूमि उपलब्ध कराई जाए ताकि संस्था इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार कर सके।
- गुप्ता ने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय दो प्रमुख भागों में विकसित किया जाएगा। पहला भाग किसान नवाचार का होगा ।
लगभग 50 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाला यह भाग कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मॉडल बनेगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि “किसान ही फैकल्टी होगा।” अर्थात् जिन किसानों ने अपने अनुभव, नवाचार और सफल प्रयोगों से कृषि में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए हैं, वही अन्य किसानों को प्रशिक्षण देंगे। यहाँ प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि तकनीक, जल संरक्षण, बायोगैस, सौर ऊर्जा, कृषि प्रसंस्करण, ग्रामीण उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण तकनीकी नवाचारों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण और शोध कार्य संचालित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय किसानों के ज्ञान को सम्मान देते हुए “किसान से किसान सीखें” की अवधारणा पर आधारित होगा, जिससे खेती को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय का दूसरा भाग बालक-बालिकाओं एवं युवाओं के लिए समर्पित होगा। इसकी सबसे अनूठी विशेषता यह होगी कि “बालक ही फैकल्टी होगा।” अर्थात् बच्चे केवल शिक्षा ग्रहण नहीं करेंगे बल्कि स्वयं सीखेंगे, प्रयोग करेंगे और अपने साथियों को भी सिखाएंगे।
इस केंद्र में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्य, कृषि एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, लोक परम्पराएँ, विज्ञान, नवाचार, नेतृत्व विकास, रचनात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण के संस्कार विकसित किए जाएंगे। बच्चों को ऐसी शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा जिसमें वे ज्ञान के उपभोक्ता नहीं बल्कि ज्ञान के सृजक और प्रसारक बनेंगे।
गुप्ता ने कहा कि आज आवश्यकता ऐसी शिक्षा और कृषि व्यवस्था की है जो समाज को आत्मनिर्भर, नवाचारी और संस्कारित बनाए। प्रस्तावित विश्वविद्यालय किसानों, ग्रामीण युवाओं और बच्चों को एक ही मंच पर जोड़कर कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में नया मॉडल प्रस्तुत करेगा।


