खैरथल जिला अस्पतालः जिले के गठन के तीन साल बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार न के बराबर, विशेषज्ञ व आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का इंतजार
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। जिले के गठन को तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन खैरथल जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी जिला स्तर तक विकसित नहीं हो पाई हैं। जिले का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि यहां आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा, विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात होंगे और गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। लेकिन धरातल पर वर्तमान हालात लगभग पहले जैसे ही बने हुए हैं।
जिला मुख्यालय पर संचालित सेटेलाइट अस्पताल तेजी से बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या के अनुरूप विकसित नहीं हो पाया है। प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी पूरी तरह इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, आधुनिक जांच सुविधाओं की अनुपलब्धता और सीमित संसाधन मरीजों की परेशानियों को लगातार बढ़ा रहे हैं। जिला बनने के बाद प्रशासनिक कार्यालयों का विस्तार तो हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया।
मरीजों की मजबूरी: आज भी अलवर, जयपुर और दिल्ली ही सहारा
गंभीर बीमारियों और दुर्घटना के मामलों में मरीजों को आज भी अलवर, जयपुर, भिवाड़ी और दिल्ली रेफर करना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज न मिलने और रैफर होने के कारण मरीज और उनके परिजन आर्थिक, मानसिक और समय संबंधी भारी परेशानियों का सामना करते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी अस्पताल की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इन सेवाओं के अभाव में गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज महंगे निजी अस्पतालों या बड़े शहरों की ओर जाने को मजबूर हैं।
इन विशेषज्ञ सेवाओं और डॉक्टरों की है दरकार
अस्पताल में लंबे समय से फिजिशियन, जनरल सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसी विशेषज्ञ सेवाओं की नियमित उपलब्धता की मांग की जा रही है, जो अब तक अधूरी है।
जिला स्तर पर इन आधुनिक सुविधाओं का है इंतजार
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय होने के नाते खैरथल अस्पताल में कम से कम जिला अस्पताल स्तर की निम्नलिखित सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए:
- 24 घंटे आपातकालीन सेवा, आईसीयू (ICU) और ट्रॉमा यूनिट।
- ब्लड बैंक, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी की सुविधा।
- डायलिसिस यूनिट और एनसीडी क्लिनिक।
- मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी और आयुष्मान भारत योजना के तहत समुचित उपचार।
जनता की आवाज: अधूरा नजर आता है जिला बनने का उद्देश्य
स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि जिला बनने का सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में दिखाई देना चाहिए था। तीन वर्ष बाद भी यदि मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो जिला बनने का मूल उद्देश्य ही अधूरा नजर आता है। क्षेत्रवासियों ने सरकार और उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि खैरथल के सेटेलाइट अस्पताल को पूर्ण जिला अस्पताल के रूप में अपग्रेड कर आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थाई नियुक्ति और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।


