प्रशासन की बेरुखी: कनवाड़ा का ऐतिहासिक जोहड़ सूखा, तड़प रहे जलजीव; ज्ञापन के बाद भी नही जागा प्रशासन
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन)। कस्बे के निकटवर्ती ग्राम कनवाड़ा में गोचर भूमि पर निर्मित प्राचीन जोहड़ भीषण गर्मी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण पूरी तरह सूख चुका है। जोहड़ में पानी खत्म होने से इसमें रहने वाले सैकड़ों जलजीवों (मछलियों, मेंढकों) और पानी की तलाश में आने वाले बेजुबान पशु-पक्षियों के जीवन पर भारी संकट मंडरा रहा है।
स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता मुंशी मीणा ने बताया कि यह जोहड़ सदियों पुराना है और कड़ाके की धूप व गिरते भूजल स्तर के कारण इस बार जून की शुरुआत में ही सूख गया। पानी के अभाव में कई जलजीव दम तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर गत 8 जून को ही नगर पालिका प्रशासन को लिखित पत्र सौंपकर अवगत कराया गया था। पत्र में मांग की गई थी कि आपातकालीन उपाय के तहत तुरंत जोहड़ में पानी के टैंकर डलवाए जाएं, ताकि बेजुबान जीवों को बचाया जा सके।
आश्वासन मिला, राहत नहीं ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के कई दिन बीत जाने के बाद भी नगर पालिका प्रशासन ने अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण जोहड़ के बचे-कुचे हिस्से का कीचड़ भी सूख रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है।
शीघ्र पानी नहीं डाला तो आंदोलन करेंगे ग्रामीण
- मुंशी मीणा, स्थानीय निवासी (कनवाड़ा) का कहना है कि - "यह केवल एक तालाब का सूखना नहीं है, बल्कि हमारे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का नष्ट होना है। यदि नगर पालिका प्रशासन ने दो-तीन दिन के भीतर टैंकरों के जरिए जोहड़ में पानी डलवाने की व्यवस्था नहीं की, तो ग्रामीणों को मजबूरन प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा।"
दीर्घकालिक समाधान की दरकार ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तात्कालिक राहत के लिए तुरंत पानी के टैंकर भेजे और आगामी मानसून से पहले इस प्राचीन जोहड़ का गहरीकरण (Desilting) करवाया जाए, ताकि बारिश के पानी का संचय सही तरीके से हो सके और भविष्य में ऐसी नौबत न आए।


