भरतपुर ड्रेनेज सिस्टम: कलेक्टर ने जांची काम की गुणवत्ता, जलकुंभी और सिल्ट हटाने के लिए अतिरिक्त मशीनें लगाने के निर्देश
भरतपुर (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने बुधवार को शहर के ड्रेनेज सिस्टम के तहत चल रहे जल संसाधन विभाग की मुख्य ड्रेन के निर्माण कार्य का आकस्मिक निरीक्षण किया। आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए उन्होंने जल निकासी के इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरी गति से करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने नोह पुलिया के पास चल रहे कार्य का जायजा लिया और ड्रेन के दोनों तरफ पिचिंग कार्य को समय पर पूरा करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएफसीडी, पुष्प वाटिका ड्रेन और सेक्टर 13 से आने वाले वर्षा जल की निकासी के लिए सटीक लेवल जांच की जाए और काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
कलेक्टर कमर चौधरी ने संवेदक (ठेकेदार) को प्रति माह का लक्ष्य देने और उसकी कड़ाई से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही, ड्रेन से जलकुंभी और सिल्ट (कीचड़) हटाने के लिए अलग से अतिरिक्त मशीनरी लगाने को कहा।
रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित होंगे ड्रेन के किनारे
कलेक्टर ने एक बेहतरीन विजन साझा करते हुए कहा कि ड्रेन के दोनों किनारों (बैंक्स) को इस तरह विकसित किया जाए कि भविष्य में वहाँ सड़क निर्माण हो सके। इससे यह क्षेत्र 'रिवर फ्रंट' की तरह नागरिकों के टहलने, भ्रमण करने और आवागमन के काम आ सकेगा। उन्होंने नोह ब्रिज से लेकर समसपुर तक ड्रेन कार्य की गुणवत्ता जांची और स्थानीय लोगों से विकास कार्य की गति का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा शहर की जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए ही यह विस्तृत ड्रेन प्लान तैयार करवाकर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया है।
मार्च 2027 तक पूरा होगा काम
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता बने सिंह ने बताया कि यह मुख्य ड्रेन ही भरतपुर शहर का एकमात्र जल निकासी तंत्र है। इसके पूरी तरह तैयार होने के बाद बाणगंगा, रूपरेल नदी और भरतपुर शहर के अधिशेष (अतिरिक्त) जल की सुव्यवस्थित निकासी हो सकेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस संपूर्ण कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


