कृषि विभाग की सलाह: यूरिया के विकल्प के रूप में अमोनियम सल्फेट का उपयोग करें किसान,मिट्टी जाँच के बाद करें छिड़काव
भरतपुर / कोशलेन्द्र दत्तात्रेय / 16 अक्टूबर 2026
कृषि विभाग भरतपुर ने जिले के अन्नदाताओं से रबी फसलों की बुवाई और पोषण प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण अपील की है। संयुक्त निदेशक कृषि (जिला परिषद) राधेश्याम मीणा ने किसानों से आग्रह किया है कि वे फसल की वास्तविक आवश्यकता और मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर यूरिया के स्थान पर 'अमोनियम सल्फेट' उर्वरक का संतुलित प्रयोग करें।
21% नाइट्रोजन और 24% सल्फर से युक्त है अमोनियम सल्फेट:
संयुक्त निदेशक राधेश्याम मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि अमोनियम सल्फेट उर्वरक में 21 प्रतिशत नाइट्रोजन और 24 प्रतिशत सल्फर (गंधक) पाया जाता है। इसके प्रयोग से फसलों को एक साथ दो प्रमुख आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं।
तेल निर्माण और फसल वृद्धि में है बेहद मददगार:
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों, राई, चना और अन्य रबी फसलों के लिए सल्फर की सख्त जरूरत होती है। विशेष रूप से तिलहनी फसलों जैसे सरसों में सल्फर तेल की मात्रा (Oil Content) और गुणवत्ता बढ़ाने में सीधी भूमिका निभाता है। इसलिए किसान यूरिया के विकल्प के रूप में या यूरिया के साथ अमोनियम सल्फेट का उपयोग अपनी भूमि और फसल की जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं।
जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध:
किसानों को आश्वस्त करते हुए कृषि विभाग ने बताया कि भरतपुर जिले में अमोनियम सल्फेट उर्वरक की कोई कमी नहीं है और यह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
मिट्टी जाँच के बाद संतुलित उपयोग की सलाह:
कृषि विभाग ने किसानों से आह्वान किया है कि वे उर्वरक की मात्रा तय करने से पहले अपनी जमीन की मृदा जाँच (Soil Testing) अवश्य करवाएँ। संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने से न केवल फसल उत्पादन और गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी, बल्कि भूमि की उर्वरता और स्वास्थ्य भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।

