साबी नदी का बहाव क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में, मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
बरसात का मौसम आते ही समीपवर्ती कोटकासिम व आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। इसका मुख्य कारण है कि करीब 25 वर्ष से साबी नदी के बहाव क्षेत्र पर कब्जे होने लगे। कई जगह भूमि को समतल कर खेती शुरू कर दी, तो कई स्थानों पर भूमाफिया मुख्य सड़क के पास अवैध कॉलोनियां काटकर निर्माण कर रहे हैं। नतीजतन, साबी नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया। सन 1965 और 1971 में साबी नदी ने विकराल रूप धारण कर कोटकासिम को टापू बना दिया था। चारों ओर करीब 10 किलोमीटर तक पानी फैला था। उस समय सरकार को राहत सामग्री भेजनी पड़ी थी। इस आपदा के बाद तत्कालीन सरकार ने सुरक्षा के लिए सेफ्टी पाल का निर्माण कराया था। आज हालात यह है कि सिंचाई विभाग और प्रशासन की लापरवाही से इन पालों का भी अस्तित्व मिटा दिया गया। कई जगह पाल को समतल कर खेती कर ली, तो कहीं पक्के मकान खड़े कर लिए। अब न पाल बचे है न खुला बहाव क्षेत्र। ऐसे में किसी भी समय नदी का पानी विकराल रूप लेकर कोटकासिम को डुबो सकता है।
भूमाफियाओं के हौसले बुलंदः
साबी नदी की भूमि पर अवैध कब्जे लगातार बढ़ रहे हैं। रेवाड़ी रोड पर सड़क के दोनों ओर नदी की जमीन पर कॉलोनियों का निर्माण तेज़ी से हो रहा है। मानो यहां कभी नदी का बहाव था ही नहीं। विभागीय अधिकारियों की 'कुंभकरणी नींद' के कारण भूमाफियाओं के हौसले बुलंद है और आमजन का भविष्य खतरे में है। इस बारे में संबंधितों से संपर्क का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो पाई।