गिरदावरी एप्स सर्वे में महिला पटवारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ,तकनीकी खामी के कारण सर्वे अन्य कर्मचारियों से करवाया जाए

Aug 20, 2025 - 14:42
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गिरदावरी एप्स सर्वे में महिला पटवारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ,तकनीकी खामी के कारण सर्वे अन्य कर्मचारियों से करवाया जाए

गुरला: (बद्रीलाल माली) जिले के भीलवाड़ा बनेड़ा व आसींद तहसीलों के महिला पटवारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन दिया,राजस्थान सरकार द्वारा महिला पटवारी को राज खसरा गिरदावरी एप्स द्वारा ऑनलाइन खेतों पर जाकर सर्वे करने पर महिलाओं पटवारीयों को परेशानी हो रही है इस संबंध में महिला पटवारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन दिया, इस संबंध में अन्य खामियों को निम्नलिखित कारण यह गिरदावरी अन्य कार्मिक से कराया जाए,
 अनेक खसरे पहाडियों, तालाब और जंगलों के बीच में है जिनमें जाना संभव नहीं है इसी प्रकार कुंए, रास्ते, ट्यूबवेल आदि खसरों में कोई फसल काश्त नहीं की जा सकती है लेकिन इसमें लोकेशन पर जाकर फसल का फोटो खींचकर डालने का कोई औचित्य नहीं होने पर भी वही प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। प्रत्येक खसरे पर जाने की प्रक्रिया में महिला अकेली ग्राम से दूर 5 से 10 किलोमीटर दूर सुनसान खसरों में जा रही है जिससे उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
कई जगह खेतों में ऊंची दीवारें, लोहे के गेट व फाटक, बिजली की कंटीली तारबन्दी आदि है जिन्हे कूदना किसी महिला के लिए संभव नहीं है कई जगह इस कोशिश में कपड़े फटने और शर्मिंदगी महसूस होन की घटनाएं हो रही है।
एक महिला 10 से 5 बजे तक जॉब के बाद अपने बच्चों को समय देती है परिवार को समय देती है कई महिला पटवारी साथियों के छोटे दूध मुहे बच्चे है जिन्हें पूरे दिन नौकरी के बाद समय देना होता है और इस कठिन कार्य को करने और बार बार असंभव टारगेट देने के कारण समय पर घर नहीं जा पाने के कारण उन बच्चों और महिलाओं के मातृत्व अधिकार पर असर पड़ रहा हे कई जगह सुनसान खेतों में महिलाओं पर ताने या छेडखानी जैसी घटनाओं का सामना करना पड रहा है और इस ऐप में अधिकतम खसरा गिरदावरी करने की होड व दबाव में महिलाओं को प्रातः 10 बजे से पहले और शाम को 5 बजे के बाद अंधेरे में खेतों, जंगलों में जाना पड़ रहा है जिससे उनकी सुरक्षा व लज्जा पर खतरा है।महिलाओं को मासिक धर्म के दिनों में पीड़ा से गुजरना पड़ता है हालाकिं भारतीय राज व्यवस्था में इस हेतु किसी प्रकार का निजात या अवकाश नहीं दिया गया है और महिलाएं कार्य भी कर रही है। लेकिन इस गिरदावरी ऐप में पूरे दिन खेत खेत में घूमने, इस खेत से दूसरे खेत में जाने से इस पीड़ा को शायद एक महिला ही समझ सकती है। महिलाएं कभी लिंग भेद को मानकर किसी भी फील्ड कार्य या अपने दायित्व से मना नहीं कर रही है व वर्षों से महिलाएं पटवारी रही है और उन्होने पुरूषों के समकक्ष व उनसे अच्छा कर्तव्य का निर्वहन भी किया है विपरीत हालात में भी उन्होने जबकि पूरे राज्य की किसी तहसील और उपखण्ड कार्यालय में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं होने पर भी विकट परिस्थितियों में फील्ड वर्क किया है लेकिन शायद इस ऐप को बनाने और लागू करने का उद्देश्य ही महिलाओं को उत्पीड़ित करना लग रहा है। पूर्व में सर्वेयर द्वारा की गई गिरदावरी का भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया गया जिसका सर्वेयरों में अत्यधिक रोष हं,
महिला पटवारियों की हो सुरक्षा:- लोकेशन पर जाकर गिरदावरी करने में महिला पटवारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. प्रदेश में दो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो चुका है और एक मामले में तो एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी. गिरदावरी के समय महिला पटवारी की सुरक्षा से संबंधित विभाग की ओर से निर्देश जारी किए जाए ।

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