सहनशीलता ही सबसे बड़ी तपस्या – मुनि संजय कुमार
रेलमगरा (पप्पूलाल कीर) तेरापंथ भवन रेलमगरा में आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री संजय कुमार ने प्रवचन में कहा कि "जिसे गुस्सा नहीं आता वही सबसे बड़ा तपस्वी है।" संयम और ब्रह्मचर्य को प्रिय मानने वाला साधक मुक्ति की दिशा में अग्रसर होता है।
मुनि प्रकाश कुमार ने कहा कि संयुक्त परिवार की महिमा विशेष रही है। लोढ़ा परिवार ने तपस्या के माध्यम से समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि तपस्या करना एक बात है, किंतु संस्कारी बनना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
मुनि सिद्ध प्रज्ञ ने कहा कि तपस्या में तप बढ़ना चाहिए, ताप नहीं। तपस्या का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं बल्कि आत्मा का साक्षात्कार करना है। कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल ने किया। लोढ़ा परिवार की बहनों ने समुद्र गीत प्रस्तुत किया। रवि एवं कल्पना लोढ़ा द्वारा संयुक्त तपस्या कर समाज में अद्वितीय प्रतिमान स्थापित किया गया।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा, महिला मंडल, युवक परिषद एवं किशोर मंडल ने तपस्वियों का अभिनंदन किया। सभा अध्यक्ष मुकेश मेहता, मंत्री रमेश ढालावत, युवक परिषद मंत्री सौरभ लोढ़ा, रोशनलाल टुकलिया, किशोर मंडल के निमेष मेहता, धारा लोढ़ा, हिरल लोढ़ा एवं कमल लोढ़ा ने विचार व्यक्त किए।
आसींद से आए सुनील गोखरू ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन उदयपुर से आए गौरव लोढ़ा ने कुशलता से किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष मुकेश मेहता एवं मंत्री रमेश ढालावत ने कार्यक्रम को सफल बनाने का सराहनीय प्रयास किया। उदयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, गंगापुर, भीलवाड़ा, राजसमंद, राशमी, डिंडोली, कांकरोली, बोरज आदि स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में पायल रांका ने आभार ज्ञापन किया।

