नवरात्र में चहुंओर गूंज रहे माता के जयकारे :पहाड़ी स्थित माता के मंदिर में दूर-दराज से भी आते हैं श्रद्धालु
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
शहर के हनुमान मंदिर परिसर में बना माता मंदिर भक्तों के लिए आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का अद्वितीय केंद्र है। इस स्थान को देवभूमि भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नवरात्रों में यदि कोई भक्त सच्चे मन से माता को चुनरी अर्पित करता है, तो माता उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती है।
स्थापना और महंत परंपराः- इस मंदिर की स्थापना 9 मई 1992 को किशन चंद मंगलानी अजरका वालों ने की थी। मंदिर के प्रथम महंत स्व. हरिहर दास महाराज रहे, जिनके निधन के बाद वर्तमान में मायाशंकर पाण्डेय मंदिर की व्यवस्था का कार्यभार संभाल रहे हैं।
नवरात्र में मेला और भंडारा:- प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्रों के दौरान मंदिर परिसर में दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहता है। महानवमी के दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ उठाते हैं। यह मंदिर नवरात्रों में न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनता है, बल्कि सामाजिक समरसता और भक्ति की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है।


