आधुनिक कृषि सीखने किसान जाएंगे डेनमार्क संभाग के 4 चयनित प्रगतिशील किसानों का जयपुर में हुआ ऑरियेंटेशन
भरतपुर, 7 अक्टूबर। किसानों को कम लागत में अधिक उपज लेने एवं आधुनिक कृषि व पशुपालन तकनीक की जानकारी प्रदान करने के लिए पांच दिवसीय यात्रा पर 8 अक्टूबर से डेनमार्क भेजा जा रहा हैं। जिसमें संभाग के 4 प्र्रगतिशील किसानों का चयन किया गया है जिन्हें मंगलवार को जयपुर में ऑरियेंटेशन कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट घोषणा में राज्य के 100 किसानों को खेती करने की आधुनिक तकनीक को जानने, समझने, तथा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए विदेश भेजने का निर्णय लिया गया था। डेनमार्क आधुनिक उद्यानिकी, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इससे प्रदेश के किसान सीख लेकर आमदनी दुगनी करने के लक्ष्य की ओर बढते हुए आधुनिक तकनीकी के प्रयोग से उन्नत खेती के गुर सीखेंगे।
संयुक्त निदेशक उद्यान योगेश कुमार शर्मा ने बताया कि भरतपुर संभाग के अलवर जिले से एक किसान रवि यादव, करौली जिले से एक किसान सुनील कुमार मीणा तथा भरतपुर जिले से दो किसान भंवरपाल मीणा तथा महेश कुमार मीणा का चयन डेनमार्क में पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए किया गया है। उन्होंने बताया कि बदलते परिवेश में कृषि जोत लगातार छोटी और कम होती जा रही है, फसलों के लिए गुणवत्ता योग्य सिंचाई जल की उपलब्धता बहुत कम है। ऐसी स्थितियों में उपलब्ध सिंचाई योग्य जल का फसलों की सिंचाई के लिए बेहतर उपयोग कैसे किया जाए, बरसात के पानी का संग्रहण तकनीकी तौर पर किस तरह से किया जाए। इसकी जानकारी किसान डेनमार्क से लेकर यहां के किसानों का प्रेरित करेगेें। उन्होंने बताया कि कृषि जोत के लगातार छोटी होते जाने के कारण, उसमें आधुनिक तकनीक अपनाकर किस तरह से अधिकाधिक पैदावार ली जाए, विपरीत परिस्थितियों में अधिक आमदनी प्राप्त करने के लिए कौन कौन सी तकनीकी अपनाकर खेती की जाए ताकि अधिक आमदनी प्राप्त हो सके। इन्हीं समस्याओं को केन्द्र में रखकर डेनमार्क में किसानों द्वारा अपनाई जा रही नवीन कृषि पद्धतियों, उन्नत पशुपालन की जानकारी लेकर मौके पर जाकर व्यवहारिक जानकारी ले सकेगें।
भरतपुर जिले के पंचायत समिति वैर के ग्राम चक खेरली गूर्जर निवासी महेश मीणा किसान पुत्र फ्रूट क्रॉप्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) भुसावर के सदस्य हैं। इनके द्वारा लंबे समय से आधुनिक खेती करते हुए कृषि विपणन, सब्जी उत्पादन विशेष रूप से मिर्च की खेती, उन्नत नस्ल की भैंस पालते हुए पशुपालन तथा दुग्ध व्यवसाय का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा उन्नत बीज का उपयोग करते हुए सरसों की खेती करते हैं।
वैर निवासी भंवरपाल मीणा ने आधुनिक तकनीकी युक्त खेती को अपनाते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया है। इन्होंने दो ग्रीन हाउस स्थापित किए हुए हैं, बरसात के पानी को इकट्ठा करने के लिए फार्म पोंड बनाया हुआ है तथा ग्रीन हाउस से प्राप्त उपज की, छंटाई, साफ-सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, लेवलिंग, इत्यादि के लिए पैक हाउस बनाया है। इन सभी आधुनिक विधाओं को अपनाते हुए भंवर पाल मीणा अपने क्षेत्र में रोल मॉडल किसान बने हुए हैं। वैर में कार्यरत बाबा मनोहर दास फ्रूट क्रॉप्स फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) के ये सदस्य भी हैं।
करौली जिले की टोडाभीम पंचायत समिति के ग्राम नांगल शेरपुर निवासी प्रगतिशील किसान सुनील कुमार मीणा और इनका परिवार लंबे समय से आधुनिक खेती अपनाए हुए है। बूंद बूंद सिंचाई पद्धति, सब्जियों की खेती, वर्मी कंपोस्ट अपनाकर जैविक खेती कर रहे हैं। इन्होंने बरसात के पानी को इकट्ठा करने के लिए फार्म पोंड बनाया हुआ है। शुरुआत में इन्होंने प्याज़ भंडारण के लिए उद्यान विभाग के माध्यम से प्याज़ भंडारण ढांचे तथा ग्रीन हाउस स्थापित किए थे।
अलवर जिले में पंचायत समिति उमरैन के गांव नगला रारसीस के निवासी रवि यादव शैड नेट हाउस, बूंद बूंद सिंचाई पद्धति, मल्चिंग, लो टनल, सब्जी उत्पादन, बागवानी तथा बीज उत्पादन कार्य से जुड़े हुए हैं। इनके माध्यम से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। रवि यादव अपनी आधुनिक तकनीक द्वारा की जा रही खेती के लिए कृषि विभाग द्वारा पंचायत समिति स्तर पर पुरुस्कृत किए जा चुके हैं।
संयुक्त निदेशक ने बताया कि प्रदेश के 38 किसानों का पहला दल डेनमार्क के लिए 8 अक्टूबर को दिल्ली से रवाना होगा। चयनित प्रगतिशील किसानों को मंगलवार, 7 अक्टूबर को जयपुर में विदेश यात्रा के बारे में आवश्यक जानकारी दी गई ताकि किसानों को डेनमार्क में किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। किसानों का दल ओरिएंटेशन के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त कर दिल्ली के लिए रवाना होगा।
उन्होंने बताया कि डेनमार्क में ये किसान, जल बचत के लिए लो टनल, मल्चिंग, फव्वारा सिंचाई पद्धति, बूंद बूंद सिंचाई पद्धति, मिनी फव्वारा सिंचाई पद्धति, माइक्रो फव्वारा सिंचाई पद्धति, संरक्षित खेती योजनांतर्गत ग्रीन हाउस के विभिन्न रूपों जैसे शैड नेट हाउस और पॉली हाउस के बारे में तकनीकी तथा व्यावहारिक जानकारी लेंगे। उन्होंने बताया कि डेनमार्क दुनियाभर में आधुनिक तकनीकी कृषि पद्धति एवं उन्नत नश्ल के दुधारू पशुपालन के लिए जाना जाता है। ऐसे में किसान प्रदेश में जलवायु के अनुरूप उपलब्ध संशाधनों का उपयोग कर आधुनिक कृषि की जानकारी सीखकर अन्य किसानों का भी प्रेरणा का कार्य करेगें।
- कोशलेन्द्र दत्तात्रेय

