दीवाली पर पटाखों पर रोक को लेकर बंटे विचार पर्यावरण प्रेमियों ने किया समर्थन, तो आम लोगों ने जताई नाराजगी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर /कमलेश जैन) दीवाली नजदीक आते ही पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर कई नागरिकों और व्यापारियों ने इस कदम पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह परंपराओं और आजीविका दोनों पर असर डालता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखों पर रोक जरूरी और समयानुकूल फैसला है। विशेषज्ञों के अनुसार, दीवाली के दौरान उपखंड क्षेत्र समेत कई शहरों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। पर्यावरण कार्यकर्ता कहते हैं हम दीवाली मनाएं, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं। रोशनी और खुशी तो दीपों और अपनेपन से भी फैलाई जा सकती है, इसके लिए धुएं की ज़रूरत नहीं है।
विरोध का स्वर भी बुलंद हालांकि, कई लोग इस रोक को एकतरफा निर्णय बता रहे हैं। पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार के आदेश से उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है। पटाखा कारोबारी ने कहा, हमने लाइसेंस लेकर कारोबार शुरू किया, लेकिन अचानक रोक लगा दी गई। अब हमारे पास लाखों रुपये का स्टॉक फंसा हुआ है।
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि दीवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें पटाखे जलाना आनंद और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। अगर लोग सीमित मात्रा में, सुरक्षित जगहों पर और पर्यावरण अनुकूल पटाखे चलाएं, तो यह कोई अपराध नहीं होना चाहिए।
डॉक्टरों ने बताया कि यह प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है।
ग्रीन क्रैकर का विकल्प सरकार ने इस बार ग्रीन क्रैकर यानी कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों को बढ़ावा देने की अपील की है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन क्रैकर की उपलब्धता सीमित है और इनके बारे में जागरूकता भी बहुत कम है।
प्रशासन ने पटाखों की बिक्री और जलाने पर सख्त निगरानी की घोषणा की है। जिन लोगों को नियमों का उल्लंघन करते पाया जाएगा, उनके खिलाफ जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।