खेत-खलिहान से नेतृत्व तक कृषक महिला दिवस का प्रेरक आयोजन
रामगढ़ (राधेश्याम गेरा ) कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), नोगांव अलवर प्रथम में अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस वर्ष 2025 के अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस की थीम रही ग्रामीण महिलाएँ सभी के लिए पौष्टिक भोजन के लिए खेती करती हैं ।,
जो कि ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को उजागर करता है । यह थीम इस बात पर जोर देती है कि ग्रामीण महिलाएँ केवल भोजन उत्पादन ही नहीं करतीं, बल्कि यह सुनिश्चित करती हैं कि यह भोजन पौष्टिक और सुरक्षित हो। वे खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह थीम ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान और सतत कृषि पद्धतियों को भी प्रोत्साहित करती है, जो स्वस्थ मिट्टी और पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस.सी. यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके नवगांव (अलवर 1) ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूनम प्रजापति, विषय विशेषज्ञ (विस्तार शिक्षा) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मौजूद 43 ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया । ग्रामीण महिलाओं की कृषि, पोषण और आत्मनिर्भरता में भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया ।
डॉ. यादव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ग्रामीण महिलाएं खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि की रीढ़ हैं। उनके योगदान से न केवल परिवार बल्कि समाज भी पोषण और आर्थिक रूप से सशक्त होता है। उन्होंने महिलाओं को जैविक खेती, पोषण वाटिका, एवं स्वरोजगार आधारित उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया ।
डॉ. पूनम प्रजापति ने कहा कि महिला किसानों की वास्तविक क्षमता का उपयोग किए बिना ग्रामीण विकास अधूरा है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया ।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. हंसराम माली द्वारा ग्रामीण महिलाओं को कृषि सम्बंधित नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया तथा श्री मुकेश सेपट ने भी आयोजन में सहयोग दिया । इस अवसर पर महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।