दृष्टि दीदी हर गाँव-हर घर अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने किया निरीक्षण
भरतपुर, ( कौशलेंद्र दत्तात्रेय)। राजस्थान ग्रामीण आजीविका परियोजना (राजीविका) एवं लेंकर्ट फाउंडेशन के मध्य हुए एमओयू के तहत 2 सितंबर से चल रहे दृष्टि दीदी हर गाँव-हर घर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा एवं निरीक्षण के लिए शुक्रवार को जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह ने भरतपुर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बांसीखुर्द एवं धानौता का औचक निरीक्षण किया।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि जिला कलक्टर कमर चौधरी के निर्देशन में संचालित यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इस योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर दृष्टि दीदी के रूप में तैयार किया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों की आँखों की जाँच कर रही हैं तथा दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान कर उपचार हेतु पात्र व्यक्तियों का चयन किया जा रहा है।
सीईओ ने निरीक्षण के दौरान ग्रामीण महिलाओं एवं दृष्टि दीदियों से संवाद कर अभियान की प्रगति का फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चयनित पाँच पंचायतों के साथ-साथ अन्य पंचायतों में भी इच्छुक महिलाओं को इस कार्य से जोड़ा जाए ताकि अधिक से अधिक परिवार इस पहल का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे की गति तेज की जाए तथा नेत्र संबंधी समस्याओं से ग्रस्त ग्रामीणों को शीघ्र चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त-
ग्राम पंचायत बांसीखुर्द की सुपीता एवं धानौता की मछला देवी ने अभियान की सराहना करते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से गाँवों में नेत्र जांच जैसी सुविधा घर-घर तक पहुँच रही है।
राजीविका की जिला परियोजना प्रबंधक भारती भारद्वाज ने बताया कि अभियान का उद्देश्य ग्रामीण एवं निम्न आर्थिक वर्ग के परिवारों तक किफायती नेत्र देखभाल सेवाएं पहुँचाना और दृष्टिहीनता की रोकथाम करना है। अब तक लगभग 14 हजार ग्रामीणों की निःशुल्क नेत्र जांच की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आगामी चरण में शिविरों के माध्यम से निःशुल्क चश्मों का वितरण भी किया जाएगा। यह अभियान न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना रहा है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सशक्त कर रहा है। इस अवसर पर जिला प्रबंधक (गैर कृषि) रिशा यादव, बाईपी राजकुमारी, सखी करिश्मा राजीविका कार्मिक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ उपस्थित रहीं।