अच्छी पैदावार से किसानों में उत्साह, 22 रुपए प्रतिकिलो तक भाव, कश्मीर और बंगाल तक भेज रहे गाजर
खैरथल (हीरालाल भूरानी ) खैरथल तिजारा नया जिला बनने के बाद समीपवर्ती गांव सोडावास की पहचान सिर्फ कृषि क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि चटक लाल गाजर के एक बड़े केंद्र के रूप में भी तेजी से उभर रही है। इस बार लाल गाजर की बंपर पैदावार होने से इसकी देशभर में भारी जावक हो रही है। सोडावास से हर दिन गाजर से भरी पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बर्दोड, कोटपूतली, अलवर व हरियाणा की मंडियों के लिए रवाना हो रही हैं। सोडावास की गाजर अपने चमकदार लाल रंग, ताजगी और समय से पहले उपलब्धता के कारण जम्मू-कश्मीर, बंगाल, उड़ीसा, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में विशेष पहचान बना चुकी है। नवंबर की शुरुआत में ही जावक शुरू होने से यह गाजर देश के बाजारों तक बाकी क्षेत्रों से पहले पहुंच रही है। व्यापारी इसकी गुणवत्ता देखने के लिए कई दिन पहले ही खेतों का दौरा करने लगते हैं। फिलहाल मंडियों में गाजर 10 से 22 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रही है।
- किसानों के लिए आय बढ़ाने का साधन बनी गाजर
किसानों के लिए यह फसल दो माह की खाली कृषि अवधि को आय में बदलने का बड़ा अवसर बन गई है। पहले किसान बाजरा कटाई और गेहूं बुवाई के बीच वाले अंतराल में खेतों को खाली छोड़ देते थे, लेकिन अब वे इस अवधि में गाजर की फसल लेकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। बाजरा कटने के तुरंत बाद गाजर के बीज डाल दिए जाते हैं और पौध लगभग डेढ़ माह में तैयार हो जाती है। कई किसान रंग और गुणवत्ता सुधारने के लिए फसल में पोटाश का उपयोग भी कर रहे हैं। सहकारी समिति सोडावास के लीलाराम सैन व पूरन जोशी का कहना है कि इस बार की बंपर पैदावार ने सोडावास क्षेत्र को गाजर का उभरता हुआ हब बना दिया है। यहां की गाजर कई राज्यों के बाजारों में लगातार भेजी जा रही है और मांग लगातार बढ़ रही है।

