जनसेवा ही कर्मयोग का मूल - डॉ. विजय वीर सिंह
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर में क्षमता निर्माण आयोग एवं संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कर्मयोगी जनसेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों में जनसेवा की भावना को बढ़ावा देना, प्रशासनिक दक्षताओं को सुदृढ़ करना तथा उन्हें कर्मचारी से कर्मयोगी की दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अध्यक्ष एवं संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने अपने संबोधन में कर्मयोग के सार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं में निष्ठा, पारदर्शिता और सेवाभाव ही एक उत्तरदायी शासन व्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि कर्मयोगी केवल अपने दायित्वों का निर्वहन करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि जनहित के प्रति पूर्ण समर्पित सेवक होता है। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संस्थागत कार्य-संस्कृति को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जन-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण बताया।
दो-दिवसीय प्रशिक्षण का संचालन क्षमता निर्माण आयोग द्वारा अनुमोदित मास्टर ट्रेनर्स डॉ. आर.के. गोयल, प्रधान वैज्ञानिक, काजरी, जोधपुर एवं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजकुमार योगी द्वारा किया गया। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक प्रशासनिक दक्षताओं, उत्तरदायित्व-निष्ठा, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सार्वजनिक सेवा मूल्यों तथा प्रभावी कार्य-संचार जैसे विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों, प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्मिकों सहित कुल 51 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इस पहल का उद्देश्य संस्थान में जनोन्मुखी कार्य-संस्कृति को और सुदृढ़ करना तथा प्रत्येक स्तर पर जनसेवा की भावना को मजबूत बनाना रहा। भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम प्रशासनिक सुधार, कार्य-कुशलता एवं सुशासन की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
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