नया साल, नया संकल्प: निरंकारी मिशन के साथ प्रेम, शांति और मानवता का संदेश
खैरथल (हीरालाल भूरानी) शहर के निरंकारी भवन में नव वर्ष 2026 (1 जनवरी 2026) पर एक विशेष सत्संग का आयोजन किया, जिसमें अलवर से आए प्रचारक महात्मा अमृतखत्री ने भक्तों को पुराने अनुभवों से सीख लेकर, मानवीय गुणों को अपनाकर और परमात्मा के ज्ञान को जीवन में उतारकर प्रेम, सेवा और समर्पण के साथ मानवता की सेवा करने का संदेश दिया, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आए और हर कोई आनंदमय जीवन जी सके।
भक्तजनो को खत्री ने बताया नव वर्ष पर सभी को आत्म-सुधार, सेवा, सुमिरण और संगत के महत्व पर जोर देते हुए, परमात्मा की ओर उन्मुख जीवन जीने की प्रेरणा दी। सतगुरु ने हमें ब्रह्म ज्ञान देकर निरंकार से जोड़ दिया। उन्होंने सेवा के बारे में बताते हुए कहा सेवा भी वही करवा सकता है जो पहले खुद सेवा करता हो।
शबरी का भाव और पक्का विश्वास देखकर रामजी उनकी कुटिया में आए उन्होंने जात पात की सब दीवारों को तोड़ दिया। आज के सतगुरु भी यही चाहते हैं।जब हम सतगुरु की नाव में बैठेंगे तो वह डूबेगी नहीं क्योंकि पतवार स्वयं सतगुरु की है।
नव वर्ष पर पुरानी कमियों को दूर कर, अच्छाइयों को अपनाकर और परमात्मा के प्रेम को महसूस कर, एक सार्थक जीवन जीने के अवसर के रूप में देखा गया। महात्मा जी ने सभी श्रद्धालुओं के लिए सुख, समृद्धि और आनंदमय जीवन की शुभकामनाएं दीं।
खैरथल के मुखी महात्मा और अन्य भक्त जनों ने नव वर्ष का संदेश देते हुए संत निरंकारी मिशन के सिद्धांतों और जिसमें 'एक निरंकार' (एक ईश्वर) में विश्वास और मानव-एकता पर जोर दिया ।

