लक्ष्मणगढ़ के बड़ा मंदिर के वैष्णव नागा साधु रामदास जी महाराज ब्रह्मलीन; सुरेश दास जी महाराज होंगे नए उत्तराधिकारी
लक्ष्मणगढ़, (अलवर/कमलेश जैन) लक्ष्मणगढ़ कस्बे के कुम्हार मोहल्ला स्थित ऐतिहासिक बड़ा मंदिर (सीताराम जी का मंदिर) के पूज्य वैष्णव नागा साधु रामदास जी महाराज का आज प्रातः 5:30 बजे निधन (ब्रह्मलीन) हो गया। उनके देवलोकगमन की सूचना मिलते ही अट्टा मंदिर, अलवर के गुरु महाराज (रामदास जी) लक्ष्मणगढ़ पहुंचे और उनकी देखरेख में संपूर्ण अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
महाराज श्री के पार्थिव शरीर की भव्य शव यात्रा कस्बे के प्रमुख मार्गों से निकाली गई, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके पश्चात पार्थिव शरीर को पुनः मंदिर परिसर लाया गया, जहाँ अलवर के गुरु महाराज के सानिध्य में पूर्ण विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इस अवसर पर अलवर के गुरु महाराज ने वैष्णव नागा परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शैव परंपरा के विपरीत, वैष्णव संप्रदाय (बैरागी साधु) के अखाड़ों में निर्वस्त्र रहने की प्रथा नहीं है; यहाँ साधु पूर्ण वस्त्र धारण करते हैं और शस्त्र विद्या (जैसे पटेबाजी) में पारंगत होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अब इस पूज्य गद्दी के नए उत्तराधिकारी सुरेश दास जी महाराज होंगे।
इस विदाई वेला और अंतिम संस्कार के दौरान जैकी खंडेलवाल, प्रकाश प्रजापत, एडवोकेट अशोक तिवाड़ी लीली, गोलू सैनी, खिल्लू राम सैनी, सुरेश सैनी, सतीश बसवाल सहित बड़ी संख्या में कस्बे के गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।


