भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तिलहन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से भरतपुर जिले में सरसों की खेती को बड़ा प्रोत्साहन मिल रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाकर खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना तथा बेहतर बीज, कृषक सहयोग और मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राधेष्याम मीना ने बताया कि जिले में सरसों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए योजना का सक्रियता से कार्यान्वयन किया जा रहा है। इसमें प्रमाणित बीज वितरण, फसल प्रदर्शन, मिनीकिट वितरण तथा कृषक प्रशिक्षण जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में जिले के 10 हजार किसानों को सरसों की उन्नत किस्म ‘राधिका’ के 400 क्विंटल प्रमाणित बीज निःशुल्क वितरित किए गए। साथ ही 30 हजार मिनीकिट (प्रत्येक 2 किलोग्राम) वितरित किए गए तथा 2,500 किसानों के खेतों पर निःशुल्क फसल प्रदर्शन आयोजित किए गए। चयनित किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जिले में सरसों की उत्पादकता को बढाने एवं कम लागत में अधिक उपज के लिए नवाचार के रूप में कार्यक्रम हाथ में लिया है इसमें जिले में सरसों का उत्पादन 22 क्वि. प्रति हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल की मंषानुरूप जिले के एक विषिष्ट कृषि उपज, वनस्पति, उत्पाद, पर्यटन स्थल और खेलों को बढ़ावा देकर समग्र विकास करना है। जिससे से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो, रोजगार मिले, सांस्कृतिक विरासत का सरंक्षण हो और आत्मनिर्भर भारत की दिषा में आगे बढ़ा जा सके। पंच गौरव कार्यक्रम के तहत जिले की पहचान के रूप में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ अन्तर्गत सरसों को शामिल किया गया है। बसंत ऋतु में पुष्प अवस्था के दौरान भरतपुर के खेत पीली चुनर ओढ़े दिखाई देते हैं। भरतपुर सरसों तेल और खली (पशु आहार) उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। जिले में सरसों उत्पादन के कारण 100 से अधिक ऑयल मिलें स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि जिले की अनेक वृहद तेल ऑयल मिलों से दक्षिण भारत के राज्यों सहित समीप के देषों में भी सरसों तेल निर्यात किया जाता है।
संयुक्त निदेशक मीना ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तिलहन योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2024-25 में सरसों का क्षेत्रफल 1,30,265 हेक्टेयर था, जिसमें उत्पादकता 1960 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। वर्ष 2025-26 में क्षेत्रफल बढ़कर 1,38,781 हेक्टेयर हो गया है।
तिलहन उत्पादन सुधार के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान
राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान सेवर, भरतपुर का है, जिसकी स्थापना 20 अक्टूबर 1993 को हुई। यह उन्नत प्रौद्योगिकियों और प्रजनन सामग्री के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी कारण भरतपुर को ‘सरसों की राजधानी’ कहा जाता है। यहां विकसित उच्च उपज वाली किस्में तेल एवं खली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशु आहार और मिट्टी की उर्वरता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तिलहन योजना से आगामी वर्षों में सरसों की उत्पादकता और किसानों की आय में और अधिक वृद्धि की उम्मीद है, जिससे भरतपुर जिला सरसों उत्पादन में देश में अग्रणी बना रहेगा।