सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त जीवन की ओर एक कदम; कोशिश पर्यावरण सेवक टीम ने पुस्तक विमोचन समारोह में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) धोरीमना ज्ञान और जागरूकता का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब मल्टीपरपज हॉल कमला देवी कॉम्प्लेक्स इंडिया इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में आयोजित लेखिका और कॉरपोरेट लॉयर अनु लाल गुरुग्राम हरियाणा की अंग्रेजी भाषा में लिखित पुस्तक बिश्नोईस एंड दा ब्लैक बक केन धर्म सेव दा एनवायरमेंट पुस्तक विमोचन समारोह केवल साहित्यिक कार्यक्रम न रहकर पर्यावरण संरक्षण का सशक्त मंच बन गया। समारोह में उपस्थित पर्यावरण सेवकों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश देकर लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया।
कोशिश पर्यावरण सेवक टीम सांचौरी-मालाणी के सह-प्रभारी व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई ने बताया कार्यक्रम की शुरुआत पुस्तक के विधिवत अनावरण के साथ हुई।उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक को ज्ञान, विचार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बताया। इसी क्रम में वक्ताओं ने कहा कि जैसे पुस्तकें हमारी सोच को दिशा देती हैं वैसे ही पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन की दिशा तय करता है।
समारोह की विशेषता यह रही कि पूरे आयोजन को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त रखने का प्रयास किया गया।प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर तांबे के लोटों से जल पिलाने की व्यवस्था कोशिश पर्यावरण सेवक टीम के द्वारा की गई। सजावट में प्राकृतिक और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग हुआ तथा अतिथियों को कपड़े और जूट के थैलों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया।
कोशिश पर्यावरण सेवक टीम के राष्ट्रीय प्रभारी व अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद् खमुराम बिश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक सुविधा तो देता है लेकिन इसका दुष्प्रभाव बहुत व्यापक है। इससे मिट्टी और जल स्रोत प्रदूषित होते हैं व पशु-पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ता है और अंततः मानव स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
इस दौरान समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण, जल एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि आज जिस पुस्तक का विमोचन हुआ है वह ज्ञान का प्रकाश फैलाएगी और इसी प्रकाश में हमें अपनी धरती को स्वच्छ और सुरक्षित रखने का संकल्प भी लेना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का प्रेरक उदाहरण भी बना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम साबित हो सकते हैं।
समारोह में कोशिश पर्यावरण सेवक टीम सांचौरी-मालाणी के प्रभारी किशनाराम बांगङवा, पर्यावरण सेवक पूनाराम मांजू जाम्भा, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारी पांचाराम जांगु सहित कई पर्यावरण सेवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि एमके रणजीत सिंह, लिपिका भूषण और विशाल चौरसिया ने अपने विस्तृत विचार रखें तथा मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई, जांभाणी साहित्य अकादमी की ओर से आरके बिश्नोई, वन्यजीव एक्टिविस्ट फतेहाबाद हरियाणा के विनोद कड़वासरा, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नरेंद्र बिश्नोई और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जगदीश गिला ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।