पंच गौरव कार्यक्रम के तहत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
भरतपुर,(कौशलेन्द्र दत्तात्रेय)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राज्य सरकार द्वारा संचालित पंच गौरव कार्यक्रम में शहद को विशिष्ट उपज के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में सेवर एवं भुसावर क्षेत्र के मधुमक्खी पालकों एवं किसानों के लिए कृषि विभाग द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपनिदेशक उद्यान जनक राज मीणा ने किसानों को संबोधित करते हुए शहद उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण एवं विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। उन्होंने बताया कि सरसों का शहद सामान्यतः 15 से 16 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर क्रिस्टलाइज्ड अथवा जम जाता है, जिसे लेकर आमजन में अक्सर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जानकारी के अभाव में कई लोग इसे नकली शहद समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह सरसों शहद की प्राकृतिक विशेषता है।
उपनिदेशक ने बताया कि सरसों शहद अपने विशिष्ट स्वाद के कारण खास पहचान रखता है। इसमें प्राकृतिक मिठास के साथ हल्की टैगिनेस (चटखारापन) पाई जाती है, जो इसे अन्य शहदों से अलग बनाती है। इन्हीं गुणों के कारण मस्टर्ड हनी की विदेशों में भारी मांग है और इसका निर्यात बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे गुणवत्तापूर्ण सरसों शहद का उत्पादन कर न केवल अपनी आय बढ़ाएं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी इसके उपयोग को बढ़ावा दें।
प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक तकनीकों, शहद की शुद्धता बनाए रखने, सही समय पर शहद निकासी, पैकेजिंग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में कुल 100 किसानों एवं मधुमक्खी पालकों ने भाग लेकर प्रशिक्षण का लाभ लिया।