प्यार का पहला खत लिखकर इंडिया इंटरनेशनल म्यूजिक लवर्स सोसायटी द्वारा द्वितीय शाम_ए_ग़ज़ल ने छुई नई उंचाइयाँ
खैरथल (हीरालाल भूरानी) इंडिया इंटरनेशनल म्यूजिक लवर्स सोसायटी (IIMLS) द्वारा आनासागर चौपाटी स्थित रेस्टोरेंट में आयोजित द्वितीय “शाम-ए-ग़ज़ल” कार्यक्रम ने श्रोताओं को सुरों की मधुर संध्या का अनुपम अनुभव कराया।
27 गायकों ने देश के ख़्यातनाम ग़ज़ल गायकों— जगजीत सिंह, पंकज उधास, गुलाम अली, मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले, हरिहरन आदि की प्रसिद्ध ग़ज़लों को स्वर देकर महफ़िल को यादगार बना दिया।
“होश वालों को खबर क्या”, “हंगामा क्यूँ बरपा”, “होठों से छू लो तुम”, “तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो” और “कोई फ़रियाद” "मैं तेरे साथ हूं" , बेताब दिल की तमन्ना यही है, छलके तेरी आँखों से , तुझसे नाराज नहीं जिंदगी जैसी कालजयी प्रस्तुतियों ने खूब तालियाँ बटोरीं।
प्रमुख ग़ज़लों में गोपेन्द्र पाल सिंह होश वालो को खबर कहाँ, नवीन भार्गव हंगामा क्यूँ बरपा , हरीश परमार आई इधर बहारें, हेम वर्मा होठों से छू लो तुम मेरा गीत , देवी सिंह छलके तेरी आँखों से , संजीव शर्मा तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, डॉ दीपा थदानी आप जिनके करीब होते है, अनिल जैन ऐसे तेरे बगैर जिए जा रहे हैं हम ,जैकलीन :* बेताब दिल की तमन्ना यही है , अर्चना पारीक फ़ज़ाँ भी है जवां 2 , दिव्या गोपलानी कभी किसी को मुकम्मल ,श्याम पारीक किसी नज़र को तेरा इंतज़ार , डॉ अभिषेक माथुर रफ्ता रफ्ता वो मेरी हस्ती , आलोक वर्मा ए गमें ज़िन्दगी कुछ तो दे मशविरा, मुकेश कोली मैं होश में था...डॉ लाल थदानी मैं तेरे साथ हूं ने सबको प्रभावित किया ।
मोहन मिश्रा प्यार का पहला ख़त , दीपक भार्गव तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो ,युधिष्ठिर चौहान वक्त का ये परिंदा रुका है कहां ,सुरेंद्र उदावत तस्वीर बनाता हूँ तस्वीर नहीं बनती , रविंद्र माथुर शामे गम की कसम , दिनेश पंवार हम तेरे शहर में आये मुसाफिर की तरह, नरेश रत्नानी कोई फरियाद (जगजीत सिंह) ने भी गायकी का हुनर दिखाया।
कार्यक्रम के अंत में होली विशेष मैशअप पर सामूहिक गीत-नृत्य एवं पुष्पवर्षा के साथ फागोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक माथुर ने किया तथा व्यवस्थाएँ गोपेन्द्र राठौड़, अनिल जैन एवं आलोक वर्मा ने संभाली।

