मांग: वंदे भारत ठहराव व फुट ओवरब्रिज पर लिफ्ट की आवश्यकता
खैरथल (हीरालाल भूरानी) खैरथल रेलवे स्टेशन केवल शहर की पहचान नहीं, बल्कि अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोडने का माध्यम भी होता है। खैरथल रेलवे स्टेशन आज आधुनिक भवन और चौड़े प्लेटफार्म के साथ खड़ा है, लेकिन यात्रियों को उस सहज रफ्तार और सुविधा का अनुभव नहीं मिलता, जो 31 साल पहले मीटर गेज के समय हुआ करती थी। इस बदलाव के बावजूद सवाल लगातार उठता है-क्या सुविधाएं सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई है?
मीटर गेज के दौर में खैरथल से दिल्ली, रेवाड़ी, अलवर और जयपुर के लिए दिन में तीन पहर रेल सेवा उपलब्ध थी। अहमदाबाद, चित्तौडग़ढ़, उदयपुर, इंदौर, रतलाम और खंडवा तक सीधी ट्रेनें भी चलती थीं। बुजुर्ग आज भी बांदीकुई-रेवाड़ी पैसेंजर "अद्धा" की यादों में खो जाते हैं।
चेतक एक्सप्रेस और दिल्ली-अहमदाबाद 3 अप 4डाउन का दौर खैरथल विकास मंच के पदाधिकारियों के लिए गौरवपूर्ण स्मृति बनकर रह गया। श्याम लाल शर्मा, मनोहरलाल परवाना, किशनचंद शर्मा , हीरालाल भूरानी सहित अन्य पदाधिकारी भावुक होकर कहते हैं कि अगर चेतक एक्सप्रेस पुनः इसी रूट पर चले, तो खैरथल फिर से रेल मानचित्र पर चमक उठेगा।
समस्याएं और यात्री असुविधा
खैरथल की एक बड़ी चुनौती सिर्फ ट्रेनों की कमी नहीं, बल्कि रेलवे लाइन के कारण शहर का भौगोलिक विभाजन भी है। किशनगढ़बास रोड, आनंद नगर कॉलोनी और रीको क्षेत्र के लोग स्टेशन तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाते हैं। खासकर फाटक नंबर 93 से प्लेटफार्म नंबर 2 तक मार्ग बंद होने से यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
खैरथल के बुजुर्ग अतीत की यादों में खोए रहते हैं, जबकि युवा बेहतर सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सवाल अब सिर्फ ट्रेनें नहीं, बल्कि शहर के समग्र विकास का है-क्या भव्य स्टेशन के साथ उसे मजबूत रेल कनेक्टिविटी भी मिलेगी या यह केवल यादों और इंतजार की कहानी बनकर रह जाएगा।
व्यापार और औद्योगिक विकास पर असर
खैरथल-तिजारा औद्योगिक क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। व्यापार महासंघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश रोघा का कहना है कि रेल सुविधाओं की कमी सीधे व्यापार और रोजगार को प्रभावित कर रही है। यदि वंदे भारत और डबल डेकर जैसी आधुनिक ट्रेनों का ठहराव खैरथल में हो, तो दिल्ली, जयपुर और अन्य शहरों से संपर्क मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। यात्रियों की मांग है कि यह रास्ता खोला जाए, जिससे प्लेटफार्म नंबर 2 तक सीधे और सुगम पहुंच सुनिश्चित हो और शहर के दोनों हिस्सों के बीच दूरी कम हो।
आवश्यक मांगें
- चेतक एक्सप्रेस का पुनः संचालन
- दिल्ली-बाड़मेर इंटरसिटी को पुराने जनहितैषी समय पर बहाल करना
- स्वर्णनगरी एक्सप्रेस का खैरथल में ठहराव
- फाटक नंबर 93 से प्लेटफार्म नंबर 2 तक मार्ग खोलना
- वंदे भारत और डबल डेकर ट्रेनों का ठहराव
- नए फुट ओवरब्रिज पर लिफ्ट सुविधा
इस संबंध में खैरथल के यूट्यूबलर एवं स्वतंत्र पत्रकार प्रमोद केवलानी ने बताया कि दिल्ली या जयपुर जाने के लिए सही समय की ट्रेन नहीं मिलती। मजबूरी में अलवर या रेवाड़ी जाना पड़ता है।
दैनिक यात्री जगदीश आचार्य ने बताया कि हम सुबह 'शटल' पकडकर अलवर जाते थे। न समय की चिंता, न सीट की मारामारी। अब स्टेशन बड़ा हो गया, मगर ट्रेनें घट गई।