मुखेना में भागवत कथा, यज्ञ पूर्णाहुति 16 को विशाल भंडारा; 31 गाँवों का होगा महासंगम
हलैना (विष्णु मित्तल) मुखेना इन दिनों केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं,बल्कि जीवंत आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया है। जहाँ 9 फरवरी से प्रारंभ हुआ श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ निरंतर भक्ति, वेदमंत्रों और हरिनाम संकीर्तन की पावन ध्वनि से वातावरण को आलोकित कर रहा है। 16 फरवरी को आयोजित होने वाले महायज्ञ, पूर्णाहुति और जिसमें 31 गाँवों के विशाल भंडारे के साथ पूर्णता को प्राप्त करेगा। समापन दिवस को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह और व्यापक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।15 को शिव परिवार प्रतिष्ठा और 151 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा धर्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब शिव परिवार की विधिवत प्रतिष्ठा (मंदिर स्थापना) संपन्न हुई। इस अवसर पर निकली भव्य कलश यात्रा में 151 महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ सिर पर कलश धारण किए, जो ग्राम की सांस्कृतिक शक्ति और नारी सहभागिता का प्रेरक प्रतीक बन गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच यह अनुष्ठान संपन्न हुआ।
इस सम्पूर्ण धार्मिक कार्ययोजना का नेतृत्व चंद्रशेखर शर्मा द्वारा श्रद्धा, संगठन और समर्पण भाव से किया गया। स्वयंसेवकों एडवोकेट डालचंद, सोनम शर्मा, महावीर प्रसाद, महेन्द्र मीणा, तिमन पाठक, संतोष, रमाकांत, पवित्र एवं सर्वेश मुखेना—ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही ग्राम के सम्मानित नागरिकों शिवलाल, धनीराम, पारस, मुंशीलाल, योगेश छगन, प्रेमसिंह मीणा, रामेश्वर, बिरजू, योगेश रमनलाल आमोली, मेवाराम मीणा, मुकेश पाठक, कैलाशचंद एवं जयदेव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की प्रतिष्ठा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।
भागवत सप्ताह के इस पावन अवसर ने मुखेना को केवल धार्मिक अनुष्ठान का केंद्र नहीं बनाया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि जब श्रद्धा, संगठन और सेवा एक साथ चलते हैं, तो एक साधारण ग्राम भी आध्यात्मिक महाकुंभ का स्वरूप धारण कर लेता है। 16 फरवरी का विशाल भंडारा उसी एकता, उसी संस्कृति और उसी लोकमंगल की भावना का उत्सव होगा—जहाँ प्रसाद के साथ संस्कार भी वितरित होंगे।