एसटीपी आवंटन के विरोध में उतरे जुसरी के ग्रामीण, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। जुसरी गांव में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि आवंटन का विवाद गहराता जा रहा है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर आवंटन आदेश रद्द करने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य को भारी नुकसान होगा। जूसरी के ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर पैदल ही मकराना एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ज्ञापन में बताया गया कि जिला कलेक्टर द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत गांव के खसरा नंबर 178 (निंबली नाड़ी) की 15.1150 हेक्टेयर भूमि में से 3 हेक्टेयर भूमि एसटीपी के लिए आवंटित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय निवासियों के हितों के विरुद्ध है। आवंटित भूमि के चारों ओर करीब 50-60 घरों की घनी आबादी है। प्लांट लगने से क्षेत्र में दुर्गंध फैलेगी और बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। जुसरी गांव की दो गौशालाओं की लगभग 600 गायें इसी गौचर भूमि पर निर्भर हैं। निंबली नाड़ी पशुओं के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है।
इसी भूमि पर इंदिरा गांधी नहर का पेयजल प्रोजेक्ट स्थित है, जो मकराना, परबतसर, बोरावड़ और 20 गांवों को पानी सप्लाई करता है। एसटीपी से इस पेयजल प्रणाली के दूषित होने की आशंका है। खसरा नंबर के पास देवलाजी महाराज, झूझार जी महाराज और किश्शतेर जी महाराज जैसे प्रमुख मंदिर हैं, जहां हर सोमवार को हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह स्थान मकराना शहर से 8 किलोमीटर दूर है और शहर के गंदे पानी के स्तर से करीब 100-150 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो व्यावहारिक नहीं है। ज्ञापन सौंपने के दौरान घासी राम भाकर, उगमा राम अणदा, महेन्द्र किरडोलिया, परसा राम टांडी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने मांग की है कि एसटीपी को मकराना के नजदीक किसी उपयुक्त और ढलान वाली भूमि पर स्थानांतरित किया जाए ताकि पर्यावरण और आस्था केंद्रों को बचाया जा सके।

