पिछले 20 दिन से मौसम में लगातार उलट-फेर, गेहूं की पछेती फसल खेतों में खड़ी; गेहूं कटाई को मजदूर नहीं मिले तो किसान मंगा रहे कटिंग मशीन, इससे खर्चा बढ़ रहा

Apr 5, 2026 - 15:19
 0
पिछले 20 दिन से मौसम में लगातार उलट-फेर, गेहूं की पछेती फसल खेतों में खड़ी;  गेहूं कटाई को मजदूर नहीं मिले तो किसान मंगा रहे कटिंग मशीन, इससे खर्चा बढ़ रहा

खैरथल (हीरालाल भूरानी)    जिले के खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी है, लेकिन कटाई को लेकर किसान परेशान नजर आ रहे हैं। वजह यह है कि पिछले साल के मुकाबले मजदूरी के दाम लगभग दोगुने होने के बावजूद कटाई के लिए मजदूर ही नहीं मिल पा रहे। इससे फसल खेतों में ही झड़ने लगी है। ऐसे में किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
गौरतलब है कि क्षेत्र में हर साल गेहूं कटाई के सीजन में उत्तर प्रदेश और बिहार से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पहुंचते थे, जिससे कम लागत में समय पर काम हो जाता था। इस बार बाहरी मजदूरों की आवक न के बराबर है। गत वर्ष गेहूं कटाई की दिहाड़ी जहां 350 से 450 रुपए थी, वह अब बढ़कर 650 से 700 रुपए तक पहुंच गई है। वहीं, ठेके पर कटाई के रेट भी आसमान छू रहे हैं। पिछले साल प्रति बीघा 2500 से 3500 रुपए में होने वाली कटाई का ठेका अब 6500 से 7000 रुपए तक मांगा जा रहा है। पिछले 3-4 दिनों से आसमान में छाए बादल और बेमौसम बारिश की आशंका ने परेशानी को और गहरा कर दिया है।

खराब मौसम को देखते हुए मजदूरों ने अपनी दरें और बढ़ा दी हैं। जो किसान मजदूरों का इंतजार कर रहे थे, वे अब फसल बचाने के लिए मशीनों (कंबाइन हार्वेस्टर) का रुख कर रहे हैं, लेकिन मांग बढ़ने के कारण मशीन संचालकों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए हैं। कुल मिलाकर मजदूरों की कमी, बढ़त लागत और मौसम की तिहरी मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
खैरथल जिले में बुवाई के आंकड़े -  गेहूं की कुल बुवाई 47965 हेक्टेयर,जौ की बुवाई 925 हेक्टेयर 

किसानों का दर्द
सूबेसिंह, किसान, झाड़का का कहना है कि - खेतों में गेहूं तैयार है लेकिन 700 रुपए देने पर भी मजदूर नहीं मिल रहे। बारिश और तेज हवा से पहले ही नुकसान हो चुका है। अब मजबूरी में मशीन से कटाई करानी पड़ रही है।
शिव सिंह, किसान, हांसपुर का कहना है कि -  हर साल बाहर से मजदूर आ जाते थे, जिससे काम आसान था। इस बार बाहरी मजदूर नहीं आए। अब परिवार के साथ मिलकर जैसे-तैसे कटाई में जुटे हैं ताकि फसल खराब न हो। 
रविंद्र यादव, किसान, माजरा का कहना है कि -  पिछले साल प्रति बीघा 3000 रुपए में ठेका हो जाता था, जो अब 7000 रुपए तक पहुंच गया है। मजदूरों की कमी व बढ़ती लागत ने खेती का गणित बिगाड़ दिया है।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी GEXPRESSNEWS54@GMAIL.COM या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................