अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को कहा जाता है, इसे अबूझ मुहूर्त
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त के कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार के अनुसार वैशाख माह आरंभ हो चुका है। जो 01 मई तक चलेगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख का महीना साल का दूसरा महीना होता है। इस माह कई तरह के व्रत-त्योहार आते हैं। जिसमें सबसे खास अक्षय तृतीया का पर्व है। अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया पर शुभ कार्य करने जैसे गृह प्रवेश करना, वाहन खरीदना, जमीन का सौदा करना, सोना-चांदी खरीदना और विवाह जैसे दूसरे मांगलिक कार्य करना बहुत ही शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
अबूझ मुहूर्त क्या होता है ?
हिंदू धर्म में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य को करने में शुभ मुहूर्त देखने को परंपरा होती है। शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कार्य अवश्य की सफल होता है। शुभ मुहुर्त में किया जाने वाला कार्य मे कभी भी बाधाएं नहीं आती हैं। लेकिन वर्ष भर में कई ऐसे व्रत-त्योहार आते हैं जिसमें शुभ मुहूर्त का विचार करने जरूरत नहीं होती है। ऐसे मुहूर्त को अबूझ मुहूर्त और फिर स्वयंसिद्ध मुहूर्त कहा जाता है। सनातन धर्म में स्वयंसिद्ध मुहूर्त की संख्या साढ़े दिन होती है।
- 1- चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि- गुड़ी पड़वा
- 2- वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि- अक्षय तृतीया
- 3- आश्विन शुक्ल दशमी- विजयादशमी
- 4- दीपावली प्रदोष काल का आधा हिस्सा
इसके अलावा इन तिथियों को भी स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है।
- 1- भड़ली नवमी
- 2- देवप्रबोधनी एकादशी
- 3- बसंत पंचमी
- 4- फूलेरा दूज
इन सभी मुहूर्तों में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया को आखातीज के भी नाम से जाना जाता है। इस तिथि पर किया गया शुभ कार्य करने से उसका क्षय नहीं होता है।


