भीलवाड़ा में शिवभक्ति की गंगा अविरल बही, मातृशक्ति के 2100 मंगल कलशों से गूंज उठा नगर

Apr 8, 2026 - 17:01
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भीलवाड़ा में शिवभक्ति की गंगा अविरल बही, मातृशक्ति के 2100 मंगल कलशों से गूंज उठा नगर

भीलवाड़ा,(बृजेश शर्मा) धर्मनगरी भीलवाड़ा की पवित्र धरा आज उस क्षण की साक्षी बनी जब भक्ति, आस्था और दिव्यता का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पूरा शहर शिवमय हो उठा। पहली बार आयोजित होने जा रही श्री शिव महापुराण कथा के स्वागत में नगरवासियों ने जिस समर्पण और श्रद्धा का परिचय दिया, वह किसी दिव्य उत्सव से कम नहीं रहा। मानो शिव स्वयं काशी से कैलाश की कृपा लेकर इस नगरी में अवतरित हो गए हों।
सुबह से ही वातावरण में भक्ति की सुगंध घुल चुकी थी, और जैसे-जैसे संध्या ढलती गई, राजेंद्र मार्ग स्कूल से निकली भव्य कलश शोभायात्रा ने पूरे नगर को आस्था के रंग में रंग दिया। 2100 मंगल कलश, जिन पर मातृशक्ति ने आस्था के दीप की तरह हाथ रखा, शिवभक्ति की अद्भुत चमक बिखेरते आगे बढ़ते रहे। चुंदड़ी ओढ़े हजारों महिलाएं जब हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच कदम बढ़ाती चलीं, तो ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं गंगा यहां उतर आई हो और उसके तरंगों में यह आस्था-यात्रा बह रही हो।
ढोल-नगाड़ों की ध्वनि, शंखनाद, भक्तिमय गीतों की लहरियां—हर दिशा में शिवनाम की गूंज। मार्ग पर पुष्पवर्षा ऐसे बरस रही थी मानो देवताओं ने स्वर्ग से आशीष भेज दिए हों। सबसे आगे धर्मध्वजा लिए अश्वारूढ़ भक्त शिवशक्ति के संदेश को पूरे नगर में विस्तार दे रहे थे। संतों का सान्निध्य इस शोभायात्रा को दिव्य प्रकाश से आलोकित करता रहा—महंत बाबूगिरी महाराज, महंत मोहनशरण शास्त्री, संतदास महाराज, गोविंदराम संत, संत मायाराम और कई revered संत-महात्मा इस आध्यात्मिक प्रवाह को और पवित्र करते रहे। राधा–कृष्ण की सजीव झांकी ऐश्वर्य और भक्ति के मधुर संगम का सुंदर प्रतीक बनी रही।
समस्त नगर मानो शिवधाम बन गया हो। यात्रा जहाँ भी पहुंची, वहां भक्ति की तरंगें और लोगों का स्वागत उमड़ता चला गया। स्त्री-पुरुष, युवा-वरिष्ठ, सभी के चेहरों पर वही भाव—“बाबा भोले की महिमा अपरंपार है।”
इसी दिव्य वातावरण के बीच बुधवार शाम प्रख्यात कथावाचक ‘कुबेर भंडारी’ पंडित प्रदीप मिश्रा का भीलवाड़ा आगमन हुआ। उनके पहुंचते ही वातावरण में संचित भक्ति की ऊर्जा जैसे चरम पर पहुंच गई। समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनका गरिमापूर्ण स्वागत किया। “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा, मानो स्वयं नंदी भी उनकी जय-ध्वनि कर रहे हों।
कथा स्थल मेडिसिटी ग्राउंड अब एक विशाल शिवधाम का रूप ले चुका है— चारों ओर भव्य डोम, लाखों श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, कूलर-पंखों का प्रबंध, पेयजल, भंडारों से उठता सेवा-भाव, 250 से अधिक अस्थायी शौचालय, चिकित्सा दल, एम्बुलेंस—हर तरफ आध्यात्मिकता के साथ व्यवस्था का संगम दिखाई देता है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चल रही भोजनशाला की भट्टियाँ—जहाँ प्रसादरूपी भोजन बन रहा है—सेवा के सच्चे स्वरूप को प्रकट कर रही हैं। रोजाना हजारों भक्तों के लिए प्रसाद तैयार हो रहा है।
समिति ने श्रद्धालुओं से सरल आग्रह किया है—सुविधा के लिए समय से पहले पहुंचे, डिस्पोज़ेबल सामग्री का त्याग करें, जल साथ रखें, आभूषण कम पहनें और वाहनों को निर्धारित पार्किंग में ही खड़ा करें ताकि भक्ति की लय में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।
अब भीलवाड़ा उस पावन क्षण की प्रतीक्षा कर रहा है जब 8 अप्रैल दोपहर 2 बजे से पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से श्री शिव महापुराण कथा का दिव्य अमृत प्रवाह आरंभ होगा। सात दिनों तक यह धरती शिवकथामृत से सराबोर रहेगी। भक्ति, ज्ञान और शिवत्व के संगम का यह पर्व इतिहास में दर्ज होने जा रहा है।
भीलवाड़ा आज सचमुच कह रहा है— “हर-हर महादेव… कथा में पधारो भोलेनाथ!”

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