घर-घर गुज रहें सोलह दिवसीय गणगौर के गीत
सीकर (सुमेर सिंह राव ) सीकर की ग्राम पंचायत बेरी में गणगौर उत्सव को लेकर महिलाओं एवं युवतियों में काफ़ी उत्साह देखने को मिल रहा हैं। यह जानकारी देते कोमल राठौड़ ने बताया कि गणगौर राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं। यह किसी न किसी रूप में पूरे राजस्थान में मनाया जाता हैं। गण भगवान शिव का पर्यायवाची हैं और गौरी देवी पार्वती का, जो भगवान शिव की दिव्य पत्नी हैं। गणगौर इन दोनों के मिलन का उत्सव हैं और वैवाहिक सुख का प्रतीक हैं। गणगौर राजस्थान एवं मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध लोक नृत्य हैं। इस नृत्य में कन्याएँ एक दूसरे का हाथ पकडे़ वृत्ताकर घेरे में गौरी माँ से अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हुई नृत्य करती हैं। इस नृत्य के गीतों का विषय शिव-पार्वती, ब्रह्मा-सावित्री तथा विष्णु-लक्ष्मी की प्रशंसा से भरा होता हैं।
गणगौर की कथा भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और तपस्या से जुड़ी हैं, जिसमें पार्वती जी ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया, और शिवजी ने प्रसन्न होकर उन्हें सौभाग्य का वरदान दिया। इसी कथा के स्मरण में गणगौर का पर्व मनाया जाता हैं, जहाँ स्त्रियाँ पार्वती जी के 'सुहाग रस' और अटूट सौभाग्य की कामना करती हैं, जिसमें गरीब महिलाओं को पहले आशीर्वाद मिलने की कहानी भी शामिल हैं, जो भक्ति भाव का महत्व दर्शाती हैं। गणगौर पूजन के दौरान कोमल सुमन सुमन निशा सरोज मोनू वासु हीना दीपा रीना मंजू उपस्थित रही