लापरवाही की इंतहा: निजी स्कूल वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों की 'ओवरलोडिंग', गेट पर लटककर सफर करने को मजबूर मासूम
मकराना (मोहम्मद शहजाद)। शहर में निजी स्कूलों की मनमानी और नौनिहालों की सुरक्षा के प्रति संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सोमवार को सामने आया है। प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद, निजी स्कूल वाहन चालक बच्चों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। ताज़ा मामला तब उजागर हुआ जब शहर की सड़कों पर एक निजी स्कूल की वैन क्षमता से दोगुने बच्चों से भरा हुआ देखा गया। वायरल वीडियो में देखा गया कि शहर के मुख्य बाईपास रोड़ से एक वैन बाईपास तिराहा होते हुए बस स्टैंड कि ओर जाती दिखी जिसमें ओवरलोड बच्चे गेट पर लटके दिखे। वहीं कई निजी विद्यालय के वैन चालक अत्यधिक तेज़ गति से वाहन दौड़ाते हुए दिखे।
नियमों की सरेआम धज्जियाँ, परिवहन विभाग और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि, स्कूल वाहन में निर्धारित सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाए जा सकते। वाहन के दरवाजे पूरी तरह बंद होने चाहिए और उन पर सुरक्षा जालियां लगी होनी चाहिए। प्रत्येक वाहन में एक अटेंडेंट का होना अनिवार्य है। इन तस्वीरों ने साफ कर दिया है कि स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक इन नियमों को दरकिनार कर केवल आर्थिक लाभ कमाने में जुटे हैं।
अभिभावकों में रोष, प्रशासन मौन, इस दृश्य को देखकर राहगीरों ने भी आपत्ति जताई। कई अभिभावकों का कहना है कि वे भारी-भरकम 'ट्रांसपोर्ट फीस' देते हैं, लेकिन उनके बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर ले जाया जाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की अनदेखी के कारण इन वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन अपनी नींद से जागेगा? क्या संबंधित स्कूल प्रबंधन इन वाहनों की निगरानी नहीं करता? सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस इन 'ओवरलोडेड' वाहनों को देखकर भी अनदेखा क्यों कर रही है?
यह लापरवाही किसी भी दिन बड़े मातम में बदल सकती है। समय रहते यदि इन वाहनों पर कार्रवाई नहीं की, तो इसकी भारी कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ सकती है।

