संविधान की पुस्तक अब सिंधी भाषा में भी, 10 अप्रैल को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन केंद्रीय मंत्री मेघवाल व विधानसभा अध्यक्ष देवनानी लोकार्पण करेंगे
भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल) भारत के संविधान की पुस्तक अब अन्य भाषाओं के साथ साथ सिंधी भाषा में भी उपलब्ध होगी। सिंधी भाषा में तैयार संविधान की पुस्तक का 10 अप्रैल को सिन्धी भाषा दिवस के दिन नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन लोकार्पण करेंगे।
सिन्धी सेवा समिति के मनीष सबदानी ने बताया कि लोकार्पण समारोह उपराष्ट्रपति भवन में होगा। समारोह में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी भी उपस्थित रहेंगे।। भीलवाडा से समारोह में भाजपा नेता विनोद झुरानी भी शामिल होंगे।
सिंधी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। सिंधी भाषा को 10 अप्रेल 1967 को सरकारी मान्यता के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने ही संसद में प्रस्ताव रखा था। वाजपेयी जी ने जो प्रयास किए उसी का परिणाम है कि आज संविधान की पुस्तक सिंधी भाषा में भी उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा एक समृद्ध भाषा है और देश के लाखों सिंधियों के लिए यह गौरव की बात है कि संविधान की पुस्तक सिंधी भाषा में भी लोगों को मिलेगी। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने सिंधी भाषा में संविधान की पुस्तक तैयार करवाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

