वीरांगना रूप कवर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन; कवियों ने ओज, वीर और हास्य रस की कविताओं से जगाई सामाजिक चेतना

Apr 13, 2026 - 20:46
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वीरांगना रूप कवर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन; कवियों ने ओज, वीर और हास्य रस की कविताओं से जगाई सामाजिक चेतना

रूपबास (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भरतपुर कस्बे की चदूशाह धर्मशाला सभागार में वीरांगना रूप कवंर जन सांस्कृतिक मंच द्वारा वरिष्ठ कवि एवं गीतकार गीतम सिंह परमार की अध्यक्षता में एवं मंच के संरक्षक हरिशंकर शर्मा वरिष्ठ शिक्षक नेता के मुख्य आतिथ्य तथा संयोजक कवि ज्ञानीराम अज्ञानी विशिष्ट अतिथि के सानिध्य में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
अतिथियों द्वारा मां शारदे के चित्र के समझ दीप प्रज्वलन कर माल्यार्पण किया गया तथा मां शारदे की वंदना नमन करते हैं चरणों में गीतम सिंह परमार द्वारा प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन में कवियों द्वारा ओज ,वीर, हास्य, श्रृंगार , भक्ति रस तथा वर्तमान राजनीतिक हालात तथा आरक्षण पर अपनी कविताएं सुनाईं।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ बाल कवि प्रणय शर्मा यश की कविता से जीवन में कुछ करना है, तो मन को मारे मत बैठो ।आगे आगे बढ़ाना है, तो हिम्मत हारे मत बैठो। प्रस्तुत की जिस पर श्रोताओं ने जोरदार तालियां बजाकर बाल कवि का उत्साह वर्धन किया तथा आशीर्वाद प्रदान किया व माल्यार्पण कर स्वागत किया। गीतकार कवि दिनेश अनुभवी ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से कहा कि जिंदगी की ये कहानी चाहिए। दुश्मनों से भी निभानी चाहिए। कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरी वीर रस के कवि संजय हिंदुस्तानी ने कहा जब ली है दुश्मनी मोल मैंने तो महंगी क्या ओर सस्ती क्या सुनाई। युवा कवि अंकित पिंगोरिया ने कहा मानवता को किया शर्मसार। दानव वृति के बंदों ने। नारी पवित्रता को दूषित किया, दूषित मानसिकता वाले दरिंदों ने। ओज के वरिष्ठ कवि मनोज खंडूजा ने कविता के माध्यम से कहा भाषा क्षेत्र जाति गोत्र पंथ संप्रदाय कितने और आधार चाहिए अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े, अति पिछड़े, अल्पसंख्यक कितने और विभाजन चाहिए।

आरक्षण की इस रक्त प्रशाचनी से। यदि आज नही सुरक्षा होगी धर्म अगर नहीं बचा तो जाति गोत्र कहां जिंदा होंगे। श्रोताओं  ने तालियां बजाकर कविता का स्वागत किया। डॉक्टर इस्लाम खानवी ने कहा दम बहुत है इस कलम की धार में। करती परवेतन सदा व्यवहार में। बहते हो तुम क्यों भला जज्बात में, बांट डाला आदमी को जात में ।सुनाई। युवा कवि एवं गीतकार योगेश कौशिक ने नेताओं पर व्यंगवान छोड़ते हुए कहा कि नेता है या है अभिनेता, मेक पिए भी शर्मिंदा है। दिखते हैं जननायक जैसे पूर चरित्र इनका गंदा है। आचार भ्रष्ट है इनके इतने खुला कमीशन यह खाते हैं, चीर हरण माता का करके मातृ वंदना भी गाते हैं। संयोजक एवं कवि ज्ञानीराम अज्ञानी ने कविता के माध्यम से कहा नन्ही कलि को फिर बबूलो में पिरो दिया। कुछ सोचने से पहले मेरा दिल ही रो दिया तथा वरिष्ठ कवि गीतम सिंह परमार ने कविता के माध्यम से कहा पावन परम पुनीत भूमि भारत की रज सिर धारौ। लहर लहर लहराए तिरंगा हिंदुस्तान हमारौ। देश भक्ति रचना सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। अंत में मंच के कवि दिनेश अनुभवी का राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर द्वारा हिंदी प्राध्यापक के पद पर चयन होने पर उनका माल्यार्पण कर साफा बांधकर तथा शाल उड़ाकर स्वागत किया गया। कवि सम्मेलन में निरंजन सिंह राजावत, ओमकार शुक्ला, गोपेश शर्मा, प्रताप दत्तात्रेय सिरसौदा, राकेश शर्मा आगरा वाले,  कुबेर सिंह राजावत, सत्यवीर किरार व नंदकिशोर बंसल आदि उपस्थित।

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