खरमास का समापन आज 19 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त, गूंजेगी शहनाइयां

Apr 15, 2026 - 17:28
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खरमास का समापन आज 19 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त, गूंजेगी शहनाइयां

लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) आज 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद से फिर शादियों का दौर शुरू हो जाएगा। खरमास खत्म होते ही विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य 14 अप्रैल के बाद शुरू होजाएगे।15 मार्च से लगे खरमास की समाप्ति 14 अप्रेल से आज हो गई है।  योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार शर्मा ने बताया कि अब मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
खरमास खत्म, फिर भी नहीं होंगे शुभ कार्य
सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास यानी मीन महीना खत्म हो गया है। इससे पहले 15 मार्च को सूर्य के मीन राशि में आने के बाद मीन मास चल रहा था। खरमास होने के कारण पिछले एक महीने से हर तरह के मांगलिक कामों पर रोक लगी हुई थी। लेकिन अब इनके लिए मुहूर्त रहेंगे हालांकि खरमास खत्म होने के बाद पंचक शुरू हो रहे हैं इसलिए 5 दिन तक मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।
ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि जब सूर्य मीन राशि में रहता है तब इन दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। इस दौरान सिर्फ जप, तप और स्नान-दान करना चाहिए।  19 अप्रैल  को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त है, जिसमें बिना पंचांग देखे विवाह किए जा सकते हैं। मई का महीना भी शादियों के लिए काफी अच्छा रहने वाला है। इस दौरान गुरु और शुक्र की स्थिति अनुकूल रहने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
चातुर्मास 2026
14 अप्रैल 2026 से विवाह का मौसम पुनः शुरू हो जाएगा, जो चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा। चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है।देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी।  इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे।
अप्रैल में विवाह मुहूर्त
19 अप्रैल से 29 जून तक विवाह के लिए कुल 24 मुहूर्त हैं। अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
17 मई से 15 जून तक अधिक मास
17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसके चलते करीब एक माह तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसी कारण अक्षय तृतीया से पहले और इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन तीन माह में विवाह समारोहों की भरमार रहेगी।
गृह प्रवेश विवाह और शुभ काम
खरमास यानी मीन मास खत्म हो जाने से 16 संस्कार और अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। शुभ मुहूर्त और शुभ दिन में अन्नप्राशन, नामकरण, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ और अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। सूर्य के मेष राशि में आते ही गृह प्रवेश और विवाह के भी मुहूर्त रहेंगे। अब देवगुरु बृहस्पति भी खुद की राशि यानी मीन में आ गए हैं। जिससे हर मांगलिक कामों में गुरु का बल और बढ़ जाएगा।
विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त
विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त को शुभ माना जाता है। अगर किसी के विवाह की तारीख नहीं निकल पा रही है या फिर किसी कारण से शुभ मुहूर्त वाले दिन विवाह करना संभव ना हो तो अबूझ मुहूर्त में भी विवाह किया जा सकता है।धर्मग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी और देव प्रबोधिनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त माना गया है।
विवाह का धार्मिक महत्व
 सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।

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