गोविंदगढ़ सीएचसी में लड़का होने की 'खुशी' के नाम पर वसूली: प्रसूता और परिजनों ने स्टाफ पर लगाया पैसे मांगने का आरोप; अधिकारी बोले- जांच की जा रही है
अलवर जिले के गोविन्दगढ़ कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के बाद प्रसूताओं से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि नवजात के जन्म पर नर्सिंग स्टाफ ‘खुशी’ और ‘मिठाई’ के नाम पर परिजनों से 500 से 1000 रुपये तक की राशि जबरन ले रहा है। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित आजाद खान ने बताया कि उनकी पुत्रवधू सुबिना ने 14 तारीख की रात को एक पुत्र को जन्म दिया। इस दौरान नर्सिंग कर्मचारी ने 1100 रुपये, एक अन्य महिला ने 500 रुपये और सफाई कर्मचारी ने 700 रुपये लिए। खान का आरोप है कि पैसे न देने पर स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है और मरीज को अलवर रेफर करने की धमकी दी जाती है।
गोविन्दगढ़ के बीसीएमएचओ अमरजीत गुर्जर ने बताया- प्रसूताओं से अवैध वसूली की शिकायत सामने आई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- एक ही रात कई प्रसूताओं से वसूली के आरोप
गुरुवार रात को भी सीएचसी में वसमीना, रुकैया, रीना, सरजीना, दीपा, रफीसा और काजल सहित कई महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। आरोप है कि लड़का होने पर नर्सिंग स्टाफ ने प्रत्येक प्रसूता के परिजनों से 1000 रुपये तक की मांग की। जिन परिवारों ने पैसे देने में असमर्थता जताई, उन्हें परेशान किया गया और अस्पताल से छुट्टी देने में भी भेदभाव किया गया।
- रेफर करने की धमकी देकर बनाया जाता है दबाव
एक प्रसूता के पति नानक सिंह ने बताया कि पैसे न देने पर नर्सें अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती हैं और अलवर रेफर करने की धमकी देती हैं। उन्होंने 500 रुपये देने के बावजूद बार-बार अतिरिक्त 200-300 रुपये की मांग की। स्टाफ का कहना था कि अलवर भेजने पर ज्यादा खर्च आएगा।
- ज्यादा पैसे लिए, जल्दी डिस्चार्ज कर दिया
एक अन्य प्रसूता ने बताया कि पैसे न देने पर परिजनों को डराया गया कि रात में रेफर करने पर 1200 रुपये तक का खर्च आएगा। वहीं, जिनसे अलग से 200-200 रुपये लिए गए, उन्हें अगले दिन जल्दी छुट्टी दे दी गई। जबकि नियमानुसार प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को 48 घंटे तक अस्पताल में रखना अनिवार्य है।


