तसई में सती माता मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एवं भंडारा संपन्न,चार दिवसीय धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
कठूमर / दिनेश लेखी। ग्राम पंचायत तसई में दादी रामकुंवर सती माता मंदिर के जीर्णोद्धार उपरांत मूर्ति स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा, जागरण एवं भंडारे का चार दिवसीय धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार तसई स्थित दादी रामकुंवर सती माता मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य 7 जुलाई 2022 से प्रारंभ होकर मार्च 2026 में पूर्ण हुआ। पूर्व में यहां केवल माता के पदचिह्न विराजमान थे। चौहान वंशीय राजपूत समाज के सहयोग से मंदिर का भव्य रूप में पुनर्निर्माण कराया गया तथा सती माता की मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत 12 मई सोमवार को कलश यात्रा से हुई, जिसमें गांव की सैकड़ों महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने डीजे-बाजों के साथ मंदिर की परिक्रमा लगाई। 13 मई को मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा, 14 मई को हवन-यज्ञ एवं रात्रि जागरण तथा 15 मई को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
तसई सरपंच मुकेश सिंह चौहान ने बताया कि राजपूत समाज की सहमति से चार दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के 12 से 13 गांवों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसादी ग्रहण की। भंडारे में तसई सहित लख्खी का नगला, पीलू का नगला, धनसिंह का नगला, मुसैला का नगला, मथुआ का नगला, रामपुरा, करणपुरा, सूरजपुरा, दयालपुरा, चकचेलुआ और मसारी सहित आसपास के गांवों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंचे और भोजन प्रसादी ग्रहण की।
सती माता मंदिर सेवा समिति के सदस्य निहाल मास्टर ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में दादी रामकुंवर सती माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। गर्भगृह के समीप पूजा सामग्री एवं अन्नपूर्णा भंडार के लिए दो कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा भजन-कीर्तन के लिए हॉल का भी जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर के ऊपर 51 फीट ऊंचा एवं 12 फीट चौड़ा गुंबद बनाकर शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया है। साथ ही तीन बारादरी छतरियों में सरस्वती, लक्ष्मी एवं दुर्गा माता की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य में अब तक लगभग 25 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि मूर्ति स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा, जागरण एवं भंडारे में हुए व्यय का अभी आकलन नहीं किया गया है।
समिति के मुख्य कार्यकर्ता दुर्गा मास्टर ने बताया कि करीब 503 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1580 वैशाख बदी पंचमी को चौहान वंशीय राजपूत समाज की दादी रामकुंवर अपने पति की मृत्यु के बाद इसी स्थान पर सती हुई थीं। उसी स्मृति में यहां प्राचीन मंदिर स्थापित था, जो समय के साथ जर्जर हो गया था। अब समाज के सहयोग से इसका भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है।


