बैंक मैनेजर का पद छोड़कर 6 मई को जैन दीक्षा लेंगी, कोमल जैन सूरत में थी कार्यरत

May 5, 2026 - 17:38
 0
बैंक मैनेजर का पद छोड़कर 6 मई को जैन दीक्षा लेंगी, कोमल जैन सूरत में थी कार्यरत

सिरोही (कमलेश जैन) चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) कोमल जैन 6 मई को संयम पथ अपनाकर दीक्षा ग्रहण करेंगी। एक बैंक में मैनेजर का पद छोड़ रहीं 31 वर्षीय कोमल, भटाना से दीक्षा लेने वाली आठवीं मुमुक्षा होंगी।
सिरोही जिले के रेवदर तहसील के भटाना गांव निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) कोमल जैन 6 मई को संयम पथ अपनाकर दीक्षा ग्रहण करेंगी। एक बैंक में मैनेजर का पद छोड़ रहीं 31 वर्षीय कोमल, भटाना से दीक्षा लेने वाली आठवीं मुमुक्षा होंगी।
वे यह दीक्षा दीक्षादानेश्वरी आचार्य गुणरत्नसूरी के शिष्य आचार्य रविरत्नसूरी और जयेशरत्नसूरी की निश्रा में तपस्वीरत्न साध्वी धर्मांगरेखाश्रीजी की शिष्या के रूप में लेंगी। इसी अवसर पर साध्वी धर्मांगरेखाश्रीजी की 100वीं ओली का पारणा भी भटाना में होगा और कोमल गुरुमाता प्रवर्तिनी पुण्यरेखाश्रीजी के समुदाय की 497वीं शिष्या बनेंगी।
दीक्षा महोत्सव के निमित्त सोमवार को आचार्य रविरत्नसूरी और आचार्य जयेशरत्नसूरी सहित कई मुनि व साध्वियों का भटाना में भव्य सामैया हुआ। जैन संघ भटाना के प्रवक्ता महेन्द्र परमार ने बताया कि सोमवार को गुरुवंदना, शक्रस्तव अभिषेक और वस्त्र रंगने जैसे कार्यक्रम हुए। मंगलवार को वर्षीदान का वरघोड़ा निकलेगा और बुधवार को मंगल मुहूर्त में आचार्य भगवंत कोमल जैन को दीक्षा प्रदान करेंगे। गांव को महोत्सव के लिए सजाया गया है।
संसार एक सपना है, संयम सत्य: चार्टर्ड एकाउंटेंट कोमल जैन का दीक्षा संकल्प
सिरोही जिले के भटाना निवासी पुखराज की पुत्री कोमल जैन चार्टर्ड एकाउंटेंट की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बैंक में मैनेजर बनीं। अच्छे पद पर कार्यरत होने के बावजूद दीक्षार्थी कोमल ने अब संयम का मार्ग चुना है।
दीक्षार्थी कोमल जैन ने कहा कि संसार एक सपना है, संयम का मार्ग सत्य का मार्ग है। सीए की पढ़ाई और बैंक की नौकरी के बाद भी जैन धर्म के प्रति गहरे लगाव ने उन्हें यह मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया, जिसमें माता-पिता की भी सहर्ष स्वीकृति मिली।
जैन धर्म के प्रति गहरा लगाव
जैन धर्म के प्रति उनका गहरा लगाव और उसे जानने-समझने का जुनून ही उन्हें दीक्षा ग्रहण करने तक ले आया। कोमल जैन ने बताया कि पालीतणा में उपधान करने के दौरान उन्हें वहां विराजित दादा आदिनाथ की असीम कृपा प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका मन संयम की ओर मुड़ गया। उन्होंने संस्कृत ज्ञान, कर्मग्रन्थ, जीवीचार और नवतत्व का गहन अध्ययन किया और फिर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का निश्चय किया।
माता-पिता ने उत्तम संस्कार दिए
दीक्षा से पहले कोमल जैन ने अपने माता-पिता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने उन्हें उत्तम संस्कार दिए, देव-गुरु और धर्म की पहचान करवाई तथा सभी स्वार्थों को एक तरफ रखते हुए आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की सहर्ष स्वीकृति दी। कोमल की बहनें भानू और गुंजन, भाई गुणवंत कुमार और भाभी रुचिका ने उसके त्याग को नमन किया। माता-पिता ने 'विजयी भव' का आशीर्वाद देते हुए अपनी कामना जताई कि कोमल जैन जिन शासन की शान बढ़ाएं।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी GEXPRESSNEWS54@GMAIL.COM या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................