4 की बजाय 1 इंच की परत बनाई, सीमेंट कंक्रीट पेनल्स में दरारें, एम सैंड की बजाय क्रेशर डस्ट काम में ली; 3 इंजीनियर सस्पेंड, 3 को चार्जशीट
अंता (शफीक मंसूरी ) अंता में चंबल की दाईं मुख्य नहर के काम में घटिया निर्माण का खुलासा, अब सीएडी ने घटिया निर्माण को हटाना शुरू किया
खबर का असर चंबल की दाई मुख्य नहर (RMC) में अंता में चल रहे 100 करोड़ रुपए के काम में सीएडी के इंजीनियरों ने बड़ा घपला कर दिया। विभागीय जांच में निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री काम में लेने का खुलासा होने पर जल संसाधन मंत्री ने 3 इंजीनियर सस्पेंड कर दिए और तीन को चार्जशीट दी है।
सीएडी के चीफ इंजीनियर संदीप माथुर साइट देखकर गए थे। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता (प्रशासन) की ओर से जारी आदेश के अनुसार दाई नहर उपखंड सीएडी अंता के कनिष्ठ अभियंता नेमीचंद बैरवा, सोनू कुमार गोचर और दीपक चौधरी को निलंबित किया है। नहर खंड द्वितीय (सीएडी चंबल कोय) के अधिशासी अभियंता हेमराज मीणा, सहायक अभियंता एवं तकनीकी सहायक नरेश मालव और दायीं नहर खंड सीएडी चंबल अंता के सहायक अभियंता अमित कुमार बोहरा को चार्जशीट देकर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
अधीक्षण अभियंता, सिंचाई (वृत्त सीएडी कोटा) और अधीक्षण अभियंता, गुण नियंत्रण (इकाई कोटा) ने 29 अप्रैल को निरीक्षण किया। मौके पर लाइनिंग 4 इंच मोटी होने की बजाय मात्र 1 से 2 इंच मोटी ही मिली। 57.50 से 124.00 किमी के बीच चल रहे कार्यों में न केवल घटिया काम हो रहा है, बल्कि पिछले साल जो सीमेंट कंक्रीट पेनल्स बनाए, उनमें बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। निर्माण कार्य में नियमानुसार एम-सैंड या प्राकृतिक रेत का इस्तेमाल होना था, लेकिन ठेकेदार धड़ल्ले से सस्ती क्रेशर डस्ट मिला रहे थे। रिपोर्ट के बाद एक मई से ही चिह्नित किए गए घटिया कार्यों को मौके से हटवाना शुरू कर दिया है। साइट इंजीनियर्स को सख्त आदेश हैं कि जब तक मापदंड के अनुसार काम न हो, निर्माण आगे न बढ़ाया जाए।
यह कंपनियां कर रही है काम
पंजाब, हैदराबाद और गुजरात की फर्म कर रही काम 202, वाली गली, शिव कॉलोनी, भटिंडा (पंजाब) मै. गार्गा एसोसिएट्स, गली नंबर-1, शिव मंदिर मै. एरो कंस्ट्रक्शन लि., फ्लैट नंबर तेजस्विनी अपार्टमेंट्स, हैदराबाद मै. नियति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लि. कल्पवृक्ष कॉम्प्लेक्स, वड़ोदा (गुजरात)
आपको बता दे
अंता कोटा से निकलने वाली मध्य प्रदेश तक जाने वाली चंबल की दांयीं मुख्य नहर पर चल रहे निर्माण लाइनिंग कार्यों में भ्रष्टाचार की खबर प्रकाशित करने पर कुछ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेते हुए निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया जिसमें CAD अधिकारियो की पूर्ण लापरवाही सामने आने के बाद सीएडी उच्च अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई की है। 29 अप्रैल को किए गए निरीक्षण में घटिया लाइनिंग निर्माण हुए लगभग नहर के दोनों साइड 500 मी लाल निशान लगाए गए औरत तोड़ने के आदेश दिए गए यह सारा ममला अधिशाषी अभियंता की लापरवाही एंव संवेदकों द्वारा घटिया निर्माण कार्य किए जाने की पुष्टि हुई।
अमलसरा से लेकर बारां पुलिया तक निरीक्षण में कहीं जगह नहर की लाइनिंग में दरारें भी पाई गईं, जिससे काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। इस पर कार्रवाई करते हुए 1 मई को निर्देश पर गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर बुलडोजर चलवाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। साथ ही संबंधित कार्यों को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया। अमलसरा से बारां पुलिया तक 16 किमी में लाइनिंग का काम किया जा रहा है। यह 52 करोड़ व 57 करोड़ के अलग-अलग पैकेज में हैं। इसका बुधवार को निरीक्षण किया। जिसमें लगभग 500 मीटर हजार लाइनिंग को चिंहित गया था। उसे हटवाया गया है।
अनुबंध की शर्तों के अनुसार ही आपको बता दे संवेदक द्वारा इतना भारी भरकम निर्माण किया गया लेकिन सीएडी अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता सहित अधिकारी की देखरेख में इतना भारी भरकम भ्रष्टाचार की लाइनिंग कैसे हो गई का निर्माण का भुगतान भी कर दिया गया 70 साल में पहली बार नहर को पक्की करने का करोड़ों का बजट पास कर पक्की करवाई जा रही है ऐसे घटिया निर्माण कार्य से भ्रष्टाचार की हुआ रही है यदि नहर निर्माण कार्यों की जांच कमेटी गठित कर जांच की जाए तो कई अधिकारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ सकती है करोड़ की लागत से किए जा रहे नहर लाइनिंग कार्य में तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, आलय यह है कि काम पूरा होने से पहले ही लाइनिंग में जगह जगह दरारें आ गई हैं। कार्य की गुणवत्ता को लेकर समय समय पर खबरे प्रकाशित भी की गई जहां इस काम में बंदरबांट की बू ऑ रही है,तो दूसरी ओर संवेदक अधिकारियो के बीच पार्टनरशिप की भी जाँच होना चाहिए प्राप्त जानकारी के अनुसार दाई मुख्य नहर चल रहे इन दिनों करोड़ो की लागत से निर्माण कार्य नहर पर लाइनिंग कार्य सुर्खियों में हैं।
दोबारा शुरू हुए इस काम से अब तक लगभग 60,70 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा लाइनिंग कार्य हो चुका है, लेकिन काम में अमानक सामग्री के अलावा तकनीकी पहलुओं को अनदेखी की वजह से लाइनिंग में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। कृषकों ने बताया कि लाइनिंग में स्लोप बनाने के पहले मुरम डाल कर कांपेक्सन व तराई नहीं किया गया। स्लोप ढालने के अनुपातहीन सीमेंट कांक्रीट का मसाला बनाया गया, पेवर व वाईब्रेटर नहीं चलाने के कारण स्लोप की परत मजबूत नहीं हुई है। ना ही नियमानुसार सीएनएस डाली जा रही ना ही कोई सीएनएस प्लांट लगाया गया है काम के चलते भरी गर्मी में लाइनिंग बनाई जा रही है वहीं तराई नहीं की गई। जिसकी वजह से सीमेंट धूल बनकर उड़ने लगी है। बनते ही नहरों की लाइनिंग में दरारें आना प्रारंभ हो गई है। निर्माण कार्य के गुणवत्ता पर अब सवाल भी उठना प्रारंभ हो गए हैं।


