अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में गूँजे सावन के लोकगीत, डॉ. वेद प्रकाश 'सहज' ने अहीरवाटी गीत से बांधा समां
अलवर (कमलेश जैन) प्रवासी भारतीयों की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था 'साझा संसार फाउण्डेशन, नीदरलैंड' एवं 'जाट बहरोड़, भारत' के संयुक्त तत्वावधान में हाल ही में एक अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी 'राठ की चौपाल' का भव्य आयोजन किया गया। 'सावन के लोकगीतों में प्रकृति, प्रेम और दर्शन' विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता विदेश मंत्रालय के अधिकारी एवं पूर्व राजनयिक शिव मोहन सिंह ने की।
इस संगोष्ठी में अलवर के कला कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. वेद प्रकाश यादव 'सहज' ने विशिष्ट वक्ता के रूप में शिरकत की। डॉ. सहज ने विषय की गहराई पर प्रकाश डालते हुए अहीरवाटी भाषा में सावन का एक स्वरचित विरह गीत प्रस्तुत किया, जिसे देश-विदेश से जुड़े श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहा।
- सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास
कार्यक्रम की शुरुआत साझा संसार फाउण्डेशन के अध्यक्ष डॉ. रामा तक्षक के स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संस्था के उद्देश्यों और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर चर्चा की। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड लैंग्वेजेज की डीन डॉ. मीरा गौतम ने सावन के गीतों के दार्शनिक पहलुओं को सामने रखा।
- देश-विदेश के दिग्गजों की रही मौजूदगी
इस अंतर्राष्ट्रीय चौपाल में इटली से निधि मिश्र, लंदन से वंदना खुराना तथा अमेरिका से मंच संचालिका विनीता तिवारी ने जुड़कर वैश्विक उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं भारत से लेखिका ऋतु प्रिया खरे, चित्तौड़गढ़ के सहायक आचार्य किशन दान, जयपुर की गीता परसोपा, सवाईमाधोपुर की सुशीला और मुंडावर के प्रसिद्ध अलीबख्श ख्याल गायक एस.डी. खान सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
यह पूरा कार्यक्रम टी-सीरीज, नोएडा के राजेंद्र शर्मा के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम प्रमुख राम स्वरूप रावतसरे के निर्देशन में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का संयोजन राजकीय महाविद्यालय, निवाई की हिंदी सहायक आचार्य डॉ. सुमन सिरोहीवाल ने किया, जबकि तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी रवींद्र शर्मा, चित्रपाल सिंह एवं रेखा मीना ने बखूबी संभाली।


