रेफरल सेंटर बनकर रह गया चौरीचौरा सीएचसी, सुविधाओं के बावजूद घट रही मरीजों की संख्या
गोरखपुर (शशि जायसवाल) चौरीचौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), जो कभी क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर इलाज का प्रमुख केंद्र माना जाता था, अब धीरे-धीरे रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में सुविधाएं और चिकित्सक उपलब्ध होने के बावजूद अधिकांश मरीजों को जिला अस्पताल या एम्स रेफर कर दिया जाता है। इससे अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले प्रतिदिन 50 से 60 मरीज इलाज के लिए सीएचसी पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी घट गई है। कई मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में सीधे गोरखपुर के बड़े अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में निजी और झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार करा रहे हैं।
इलाज से ज्यादा रेफरल पर जोर
लोगों का कहना है कि पहले तैनात चिकित्सक गंभीर मरीजों का भी इलाज करने का प्रयास करते थे, लेकिन अब मामूली बीमारी से लेकर गंभीर मामलों तक में मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि जटिल मामलों में जोखिम से बचने के लिए मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाता है।
व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
नगर पंचायत मुण्डेरा बाजार के पूर्व सभासद नवीन कुमार जायसवाल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अस्पताल में टोकन या लाइन व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं पैथोलॉजी विभाग में जनरेटर खराब होने से जांच कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
प्रभारी ने दिया स्पष्टीकरण
सीएचसी प्रभारी ने बताया कि सभी चिकित्सक समय पर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है, उन्हें बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल या एम्स रेफर किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, तो एक बार फिर लोगों का भरोसा इस स्वास्थ्य केंद्र पर लौट सकता है।


