धूमधाम से संपन्न हुआ भगवान शिव-पार्वती विवाह महोत्सव , जयकारों से गूंजा कथा पंडाल
कोटड़ी श्याम (गुरला / बद्री लाल माली)
क्षेत्र में आयोजित श्री हरिहर शिवमहापुराण कथा महोत्सव के अंतर्गत भगवान शिव एवं माता पार्वती का दिव्य विवाह समारोह बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर कथा पंडाल को भव्य रूप से सजाया गया था। भगवान शिव-पार्वती के विवाह की जीवंत व मनमोहक झांकी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
प्रकृति और पुरुष के संतुलन का दिव्य संदेश
कथा व्यास परम श्रद्धेय गौवत्स पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह के आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति का यह मिलन केवल एक विवाह नहीं है, बल्कि प्रकृति और पुरुष, चेतना और ऊर्जा तथा परिवार और समाज के संतुलन का दिव्य संदेश है।
महाराजश्री ने बताया कि माता पार्वती का कठोर तप हमें सिखाता है कि सच्चे संकल्प, श्रद्धा और समर्पण से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा—
"जहां प्रेम के साथ त्याग, विश्वास के साथ समर्पण और शक्ति के साथ विवेक जुड़ता है, वहीं सुखी एवं संस्कारित परिवार का निर्माण होता है। सच्चा दांपत्य केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुःख में समर्पित होकर साथ निभाना है।"
पुष्पवर्षा और जयकारों से गूंजा पंडाल
विवाह समारोह के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। मंगल गीतों, मधुर भजनों और दिव्य पुष्पवर्षा के बीच विवाह की समस्त वैदिक रस्में पूरी की गईं। इस दौरान पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” और “जय माता पार्वती” के गगनभेदी जयघोषों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने शिव-पार्वती के इस पावन विवाह के दर्शन कर धर्म लाभ उठाया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

