3 सूत्री मांगों को लेकर 5 आशा सहयोगिनियां पानी की टंकी पर चढ़ीं, 5 घंटे तक सांसें अटकी रहीं, गृह राज्य मंत्री से वीडियो कॉल पर वार्ता के बाद उतरीं
16वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, सुरक्षा के लिए सिविल डिफेंस ने लगाया जाल
- नीचे प्रदर्शन कर रही एक महिला हुई बेहोश, संविदा नियम-2022 में शामिल करने व ₹24,000 मानदेय की मांग
डीग (राजस्थान) अपनी 3 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आशा सहयोगिनियों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। डीग शहर के मेला मैदान में पिछले 16 दिनों से चल रहे धरने के बीच सोमवार दोपहर करीब 12 बजे 5 आशा सहयोगिनियां अपनी मांगों के समर्थन में पानी की टंकी पर चढ़ गईं। इस घटना से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। करीब 5 घंटे तक चले भारी ड्रामे और समझाइश के बाद, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और आश्वासन के बाद ही वे नीचे उतरीं।
टंकी पर चढ़ने वाली आशा सहयोगिनियों में सुनीता फौजदार, शशि, रजनी, नरेश फौजदार और लोकेश शामिल थीं। सूचना मिलते ही एसडीएम अमित मीणा, डीग कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा और सीएमएचओ विजय सिंघल जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। सुरक्षा के मद्देनजर सिविल डिफेंस की टीम को भी बुलाया गया, जिसने टंकी के चारों ओर सुरक्षा जाल बिछाया।
नीचे प्रदर्शन कर रही महिला बेहोश, अस्पताल में भर्ती एक तरफ जहां 5 महिलाएं भीषण गर्मी में पानी की टंकी पर चढ़ी हुई थीं, वहीं दूसरी तरफ नीचे मैदान में अन्य आशा सहयोगिनियां सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। इसी दौरान प्रदर्शन कर रही महिलाओं में से एक महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। उसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
गृह राज्य मंत्री को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ीं टंकी पर चढ़ीं आंदोलनकारियों का नेतृत्व कर रही सुनीता फौजदार का कहना था कि वे अब किसी भी अधिकारी के खोखले आश्वासन पर नीचे नहीं उतरेंगी। वे मौके पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को बुलाने की मांग पर अड़ गईं। जब गतिरोध ज्यादा बढ़ गया, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकाला और वीडियो कॉल के माध्यम से गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से टंकी पर चढ़ी महिलाओं की सीधी बात कराई। मंत्री से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद शाम करीब 5 बजे सभी महिलाएं नीचे उतरीं, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
आंदोलनकारी आशा सहयोगिनियां का कहना है कि - "हम बरसों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं। मातृ-शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीकाकरण तक में हमारी मुख्य भूमिका है, लेकिन हमें हमारे काम के बदले उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।" —
ये हैं 3 प्रमुख मांगें:
- राज्य कर्मचारी का दर्जा: आशा सहयोगिनियों को संविदा नियम-2022 में शामिल किया जाए तथा राज्य कर्मचारी (चतुर्थ श्रेणी) के समकक्ष दर्जा दिया जाए।
- न्यूनतम मानदेय: उन्हें प्रति माह न्यूनतम 24 हजार रुपए मानदेय दिया जाए।
- सेवानिवृत्ति लाभ: सेवा निवृत्ति के बाद 10 लाख रुपए की एकमुश्त राशि और 12 हजार रुपए मासिक पेंशन का प्रावधान किया जाए।
आशा सहयोगिनियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही वे अभी टंकी से उतर गई हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगें लिखित में पूरी नहीं हो जातीं, मेला मैदान में उनका धरना और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।


