राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश नहीं मानने पर तहसीलदार और पटवारी सस्पेंड, विभागीय जांच के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर करौली जिले के नादौती तहसीलदार और पटवारी को निलंबित करने के सख्त आदेश दिए हैं। सरकारी भूमि परअतिक्रमण हटाने में विफल रहने पर कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है। करौली जिले की नादौती तहसील में तैनात तहसीलदार दीन दयाल शर्मा और पटवारी भरत सिंह गुर्जर को अदालती आदेशों की अनदेखी करना भारी पड़ गया है। कोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं ।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद नादौती में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा है. रूपराज प्रजापत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश के बावजूद वहां दोबारा कब्जा कर लिया जाता है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 27 अप्रैल को अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जब अधिकारियों से जवाब तलब किया, तो स्थिति चौंकाने वाली रही। 2 जुलाई को हुई सुनवाई में तहसीलदार और पटवारी ने स्वीकार किया कि जमीन पर अब भी अतिक्रमण बना हुआ है।
उन्होंने इस अतिक्रमण को हटाने के लिए अदालत से और सात दिन का समय मांगा।अधिकारियों का यह रवैया देखकर खंडपीठ भड़क गई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि अधिकारी कोर्ट के आदेशों को हल्के में ले रहे हैं।
अगली सुनवाई तक रिपोर्ट देने के आदेश
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व सचिव को आदेश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ तुरंत विभागीय जांच शुरू की जाए। जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दोनों को निलंबित रखा जाएगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि स्थानीय पुलिस थाना अधिकारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जल्द से जल्द मौके से अतिक्रमण हटाया जाए। कोर्ट ने इस मामले में कड़ी चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट हर हाल में पेश की जानी चाहिए। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
- रिपोर्ट-कमलेश जैन


