माँ की मेहनत रंग लाई 6 साल की बेटी ने घर पर ही किया पूरा कुरआन मुकम्मल
अंता ( शफीक मंसूरी ) अंता सीएडी तिराहा डाबरा परिवार में माँ की मेहनत रंग लाई: 6 साल की बेटी ने घर पर ही पूरा कुरआन ए पाक किया मुकम्मल माँ रहनुमा बानो ने अपनी 6 साल की बेटी आफिया कों खुद ने घर पर ही कुरआन ए पाक के 30 पारे पढ़ा कर एक मिसाल पेश की इसका मतलब ही है इल्म मोहब्बत दुआ आजकल महंगे कोचिंग के जमाने में एक माँ ने घर बैठे 6 साल की बच्ची को पूरा कुरआन मुकम्मल करवा दिया। ये खबर दिल को छू जाती है।आज के दौर में जहाँ बच्चे मोबाइल में लगे हैं, वहीं एक माँ ने अपनी 6 साल की बेटी को घर पर बैठकर पूरा कुरआन-ए-पाक मुकम्मल करवा दिया। बच्ची की माँ खुद उसकी उस्तानी बनीं। फज्र के बाद से लेकर रात तक बेटी को पढ़ाती, सुनती और रिवीजन करवाती रहीं। बिना किसी मदरसे, बिना किसी ट्यूशन के सिर्फ माँ की दुआ और मेहनत से ये मंजिल मिली।
बच्ची के वालिद शहीद पठान भैय्या ने कहा हमें फख्र है कि अल्लाह ने हमें ऐसी बेटी दी। हम चाहते हैं कि ये इल्म आगे चलकर कौम और मिल्लत के काम आए बीवी ने दिन-रात एक कर दिया। खाना बनाते वक्त भी आयतें सुनाती थीं। अल्लाह ने माँ की गोद को पहला मदरसा बना दिया।आज के दौर में और इलाके की महिलाओं के लिए ये एक बड़ी मिसाल है। उलेमाओं का कहना है कि "जन्नत माँ के कदमों तले है और जिस माँ ने कुरआन पढ़ा दिया, उसके लिए तो जन्नत के दरवाजे और भी खुल गए।एक माँ ने घर में मदरसा खोल दिया। काश हर घर की माँ ऐसी बन जाए तो कौम में ना इत्तेफाकी भी खत्म हो और इल्म भी बढ़े। लोग घर जाकर माँ और बेटी दोनों को मुबारकबाद दे रहे हैं। माँ कहती हैं - मैंने बस इतना किया कि टीवी बंद किया और कुरआन खोला। बेटी ने बाकी कमाल खुद कर दिया।


