कर्तव्य को भूलकर किया गया पुण्य अधूरा: संत जीवण राम; विजय पार्क में आयोजित सत्संग में उमड़े श्रद्धालु
खैरथल। (हीरालाल भूरानी) शहर के विजय पार्क में आयोजित भव्य सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सत्संग में बाबा आयाराम दरबार, अहमदाबाद के गद्दी नशीन संत जीवण राम उर्फ श्याम बाबा ने अपने मुखारविंद से ज्ञान की गंगा बहाई। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने कर्तव्यों की वेदी पर किया गया पुण्य कभी फलदायी नहीं होता। इंसान को परमार्थ के साथ-साथ अपने परिवार और कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।
- 'रास्ता दिखाना' ही सबसे बड़ा पुण्य
श्याम बाबा ने एक मर्मस्पर्शी कथा सुनाते हुए कहा कि ज्येष्ठ मास की तपती दुपहरी में एक सज्जन व्यक्ति अपने प्यासे परिवार को छोड़कर पानी की तलाश में भटके। एक साधु के बताने पर वे दरिया से पानी लेने गए, लेकिन रास्ते में मिले अन्य प्यासे लोगों को पानी पिलाते-पिलाते उन्होंने अपनी बाल्टी कई बार खाली कर दी। जब वे तीसरी बार पानी लेकर लौटे, तो उनका अपना परिवार प्यास के कारण मूर्च्छित हो चुका था।
संत ने बताया कि साधु ने उस व्यक्ति की आंखें खोलते हुए समझाया कि: "अगर तुम उन प्यासे लोगों को खुद पानी पिलाने के बजाय सीधे दरिया का रास्ता बता देते, तो उनका भी भला हो जाता और तुम्हारा परिवार भी संकट में न पड़ता।"
- कर्तव्य बनाम धर्म का समझाया अंतर
सत्संग के माध्यम से संत जीवण राम ने समझाया कि किसी का भला करने का सबसे सटीक और सही तरीका यह है कि उसे परमात्मा और सच्चाई की राह दिखा दी जाए, न कि उसे बैसाखियों पर निर्भर रखा जाए। स्वयं पुण्य कमाने की होड़ में अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
संत के इन वचनों को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सत्संग की समाप्ति पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिसके बाद सभी आए हुए श्रद्धालुओं को भारी उत्साह के साथ प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य नागरिक और सेवादार उपस्थित रहे।


