मेवाड़ के इस चमत्कारी धाम में उमड़ रहा आस्था का सैलाब:"जहाँ आकाश मार्ग से उतरकर प्रकट हुईं बंक्यारानी माता
भीलवाड़ा / सत्यनारायण सेन
मेवाड़ के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले भीलवाड़ा जिले की आसींद तहसील में स्थित 'बंक्यारानी माता मंदिर' इन दिनों शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आस्था का केंद्र बना हुआ है। पहाड़ की चोटी पर स्थित यह 1100 साल पुराना ऐतिहासिक और चमत्कारी मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए पूरे राजस्थान में विख्यात है।
नवरात्रि के इन नौ दिनों में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर और राजसमंद सहित दूर-दराज से लाखों भक्त माता रानी के दर्शन और मन्नत मांगने पहुँच रहे हैं।
भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य
आसींद से लगभग 12 किलोमीटर दूर, आसींद-शाहपुरा मार्ग पर पहाड़ों की चोटी पर बसा यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है। मंदिर के आसपास की हरियाली और मनमोहक नजारा भक्तों का मन मोह लेता है। यहाँ मुख्य मंदिर के साथ ही भगवान हनुमान जी और भैरव बाबा का प्रसिद्ध स्थान भी है, जहाँ शनिवार और रविवार को विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है।
पौराणिक कथा: जब 'बाल गोपालों' की जिद पर थम गई माता की यात्रा
मंदिर के पुजारी व ट्रस्टी देवीलाल के अनुसार, मान्यताओं के मुताबिक माता बंक्यारानी ने बकेसुर राक्षस का वध किया था और वह 'बांके गढ़' में प्रकट हुईं थीं।
जब माता आकाश मार्ग से प्रस्थान कर रही थीं, तब प्राचीन बदनोर प्रांत के आमेसर के जंगलों में गाय चरा रहे कुछ चरवाहों (बाल गोपालों) ने उन्हें देख लिया और वे खुशी से चिल्ला उठे। बच्चों की इस मासूम पुकार पर माता भवानी ने अपनी आकाश यात्रा वहीं रोक दी। वे उसी स्थान पर धरती पर उतर आईं और पाषाण (पत्थर) का रूप धारण कर लिया। तभी से माता इसी पवित्र धाम में साक्षात विराजमान हैं।
चमत्कारी मान्यता:-
यह मंदिर मुख्य रूप से प्रेत बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए देश भर में जाना जाता है। मान्यता है कि मंदिर परिसर में कदम रखते ही मानसिक कष्ट से पीड़ित व्यक्ति के व्यवहार और आचार-विचार में चमत्कारिक बदलाव दिखने लगता है।
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9 दिनों का कड़ा अनुष्ठान: पीड़ित लोग और उनके परिजन नवरात्रि के दौरान यहाँ 9 दिनों का विशेष अनुष्ठान करते हैं।
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पवित्र कुंड में स्नान: महिलाएँ मुख्य मंदिर से एक किलोमीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर के पास बने पवित्र कुंड में स्नान करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज: फ्रांस में मिल चुका है 'स्वर्ण पदक'
बंक्यारानी माता मंदिर की इस अनूठी और रहस्यमयी परंपरा की गूंज केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों तक पहुँची है। मंदिर परिसर में होने वाली 'प्रेत बाधा चिकित्सा' पर मिसेज बचानी ने "आँयज शॉप स्टोन" नाम से एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। इस फिल्म को फ्रांस के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म मेले में स्वर्ण पदक (Gold Medal) से नवाजा गया था। इस रहस्य को जानने के लिए देश-विदेश से शोधकर्ता, फिल्मकार और कलाकार लगातार यहाँ आते रहते हैं।
भव्य व्यवस्थाएँ और मेला
वर्तमान में राजस्थान सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट इस ऐतिहासिक मंदिर की व्यवस्थाओं को संभाल रहा है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ भव्य मेले जैसा माहौल रहता है, जहाँ प्रतिदिन माता रानी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। दर्शन से पहले श्रद्धालु मंदिर के पास स्थित विशाल तालाब में स्नान कर पवित्र होकर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।

