भगवान् पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
कस्बे स्थित जैन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ का आज मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया। इस अवसर पर आज धर्मावलम्बियों द्वारा 23 वें तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया गया। जैन धर्मावलंबियों ने जैन मंदिर में भगवान् पार्श्वनाथ की विधिवत पूजा- अर्चना की और भगवान् पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस को श्रद्धा भक्ति से मनाया। पुजारी द्वारा कहा कि दर्शनं देव देवस्य, दर्शनं पापनाशनम्, दर्शनं स्वर्ग सोपानं दर्शनं मोक्षसाधनम्। भगवान् के दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाता है, यह स्वर्ग द्वार की सीढ़ी है और भगवन् दर्शन मात्र मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। सुबह मंदिर में भक्तो ने स्नान कर पीत वस्त्र धारण कर इकट्ठे होने लगे। भगवान् पार्श्वनाथ की प्रतिमा का जल शुद्धिकरण किया।
पार्श्वनाथ स्तोत्र और भक्तामर स्तोत्र का समूह पाठ किया गया। महिलाओं ने भगवान् पार्श्वनाथ की आरती का मंगलगान किया। नरेंद्रं फणींद्रं सुरेन्द्रं अधीशं, शतेंद्रं सु पूजेंभजं नाम शीशं.... के मधुर गायन से पूरा मन्दिर परिसर गुंजायमान हो गया। 23 वें तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में लोकेश जैन मोनित जैन धीरज जैन माणकचंद जैन आदि द्वारा भगवान का अभिषेक कर पूजा की।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि चातुर्याम धर्म के प्रणेता थे भगवान् पार्श्वनाथ - देवेश कुमार देव जैनियों के 23 वें आध्यात्मिक गुरु भगवान् पार्श्वनाथ का जन्म 872 शताब्दी ईसा पूर्व उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इक्ष्वाकु वंश के राजा अश्वसेन और रानी वामा देवी के पुत्र के रूप में हुआ। 24 वें एवं अंतिम तीर्थंकर भगवान् महावीर ने भगवान् पार्श्वनाथ के चातुर्याम धर्म में पांचवां तप मठवासी व्रत अर्थात ब्रह्मचर्य को जोड़ा। भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन से सर्पों की कई कथाऐं जुड़ी हुई हैं, इस कारण उनका प्रतीक चिह्न नाग सर्प है जो भगवान् पार्श्वनाथ की प्रतिमा के मस्तक पर विराजित हैं। इस अवसर पर इंदिरा जैन, माला जैन मुन्नी देवी, गुल्लो रानी ज्योति जैन सहित अनेक महिला पुरुष मौजूद थे।


