विश्व मानवता दिवस पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन
उदयपुरवाटी (सुमेर सिंह राव)
कस्बे के घूम चक्कर के समीप स्थित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय पाठशाला में विश्व मानवता दिवस के उपलक्ष एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें विस्तार से मानव एवं मानवता पर विचार व्यक्त करते हुए सर्वोदय कार्यकर्ता बद्री प्रसाद तंवर ने कहा कि मानव जीवन तो सुगमता से मिल जाता है किंतु इसकी विशेषता एवं महत्व के लिए जीवन भर संघर्ष करना होता है उन्होंने कहा कि मनुष्य का अर्थ है जो मन पर अंकुश रखें किंतु हो यह रहा है कि मनुष्य मन के अनुसार अपनी समस्त गतिविधियां संचालित कर रहा है। उन्होंने रामचरितमानस के "परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाही" के भावार्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूसरे का भला करने से बड़ा कोई मानव धर्म नहीं है और किसी को दुख पहुंचाने से बड़ा कोई अधर्म नहीं है अर्थात सार्थक मानव जीवन की सार्थकता मानवता में ही निहित है।
ब्रह्माकुमारी सुनीता बहन ने कहा कि दिव्य गुणों के आधर से मानव देव तुल्य बन जाता है l अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित होकर जब हम परमात्मा पिता से अपने मन को जोड़ते हैं तो सहज ही जीवन में दिव्यता आने लगती हैं जो स्वयं और सर्व के कल्याण के निमित्त बन जाते है l आशा सैनी ने कहा कि आपसी प्रेम एवं भाईचारा मानवता का मुख्य आधार है जो सृष्टि को कायम रखे हुए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट मोतीलाल सैनी ने भी इस संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति संपूर्ण विश्व को एक परिवार समझती है यदि पूरी दुनिया इस महान सिद्धांत को आत्मसात कर ले तो आपसी विवाद हो ही नहीं सकते और आपसी विवादों में मानवता को नतमस्तक नहीं होना पड़े "वसुदेव कुटुंबकम"का सिद्धांत मानवता का सर्वोपरि मंत्र है।
वीरेंद्र सैनी ने कहा कि पारस्परिक पवित्र प्रेम की ज्योति ही मानवता को प्रकाशित करेगी। एडवोकेट ताराचंद सैनी नंगल ने इस प्रकार के प्रेरणा दायक कार्य की सराहना की। संचालिका सुनीता बहन ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।
इस संगोष्ठी में एडवोकेट ताराचंद सैनी, वीरेंद्र कुमार सैनी, आशा देवी, कंचन जांगिड़ ,कुमारी गायत्री सैनी, वीना सैनी, तारा देवी, ग्यारसी, देवी, सोनू कुमार, प्रिंस एवं कुमारी किजल आदि ने भाग लिया।